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: एक अपराजित योद्धा जो आज भी लोगों के यादों में है जीवित.....लोगों और अपने क्षेत्र के लिए आजीवन रहे संघर्षशील.... स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह कि आज चतुर्थ पुण्यतिथि..

Admin

Thu, Nov 29, 2018
विक्की तिवारी
सादगी, अटूट देशभक्ति , ईमानदारी और ग्रामींण क्षेत्र चाहे वह बिहारपुर हो या आज के संयुक्त सरगुजा सहित  क्षेत्र में लोगों के दिल में आज भी यादो में अगर सूरजपुर जिले में कोई राजनीतिज्ञ हुआ तो वह नाम स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह है जो आज इस दुनिया में भले नहीं हैं  लेकिन आज भी सभी  के जहन में यह  नाम है जो अपनी सादगी के साथ शिक्षा स्वास्थ्य मूलभूत सुविधाओं पहुंच मार्ग केे साथ के लोगों की भलाई के लिए संघर्ष करने वाले शख्सियत स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह का आज चतुर्थ पुण्यतिथि है।इनके जीवन और संघर्षों पर यह कविता खुद में बहुत कुछ बया करती हैं ।
"बन सहारा बे-सहारो के लिये,
बन किनारा बे-किनारो के लिये, जो जीये अपने लिये तो क्या जीये, जी सके तो जी हज़ारो के लिये."
यह शख्सियत खुद में ही किसी पहचान का मोहताज नहीं था वरन जनसंघ के शुरुआती दौर में मध्य प्रदेश राज्य के दूरस्थ ग्रामीण अंचल से राष्ट्रीय राजनीतिक फलक तक एक अलग मुकाम हासिल किया ।इनका जन्म आज के भैयाथान विकासखंड के ग्राम सोनपुर में 1 मई 1942 को उस समय के प्रख्यात ज्योतिष विद्या में महारत और गवटिया के रूप में चर्चित स्वर्गीय गोविंद सिंह के घर इनका जन्म हुआ। शुरुआत से ही हर क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफलता हासिल करने की ललक और उस दौर में मैट्रिक की शिक्षा हासिल करते हुए एक एक चर्चित फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में पहचान हासिल करते हुए इन्होंने पुलिस विभाग में जमादार के पद तक  कार्य किया इसके बाद कोऑपरेटिव विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्य करने के साथ भारतीय स्वयंसेवक संघ से पढ़ाई के दिनो से ही लगाव  के कारण शासकीय नौकरी छोड़ राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण किया उस समय के सामान्य विधानसभा क्षेत्र सूरजपुर से 1972 में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में उस समय के कद्दावर राजनेता धीरेंद्रनाथ शर्मा को चुनौती देते हुए मात्र 900 वोटों से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अपने अटूट आत्मविश्वास और क्षेत्र के लोगों के लिए कुछ कर गुजरने की हसरत के साथ उन दिनों संसाधनों के अभाव में इस क्षेत्र में स्वयंसेवक संघ के साथ साथ भारतीय जनसंघ जो आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में स्थापित हुई है उसके शुरूआती दौर के चंद लोगों में शुमार श्री सिंह फिर से 1977 में पाल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और मध्य प्रदेश विधानसभा में अपने उपस्थिति दर्ज कराते हुए क्षेत्र में विकास कार्य के साथ आदिवासी वर्ग के साथ साथ अन्य वर्गों के उत्थान के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने सबसे पहले शिक्षा के लिए उपयुक्त संसाधन उपल्ब्ध कराने के लिए सतत प्रयास का परिणाम हैं कि  कई स्कूल और कॉलेज की स्थापना हुई और  लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक और शिक्षित होने के लिए प्रेरित करते हुए सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र पहुंच विहीन  क्षेत्रों में सड़क पुल पुलिया का निर्माण कराने इनकी भूमिका आज भी लोगों के जहन में हैैं । इसके बाद सूरजपुर विधानसभा से लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित होनेेे के साथ मध्य प्रदेश सरकार में आदिम जाति कल्याण मंत्री बनने के साथ आजीवन क्षेत्र के लिए काम करने और लोगो के कल्याण हेतु कई कार्य इन्होनें किया जिसके कारण लोगो के यादों में आज भी स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह जिंदा है जिन्हें क्षेत्र का मसीहा तक लोगों ने उपाधि दी थी।
राजनीति में पदार्पण और पहली जीत स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के अभाव समाज में फैली कुरीतियां और शिक्षा सहित अन्य सुविधाओं से मोहताज क्षेत्र मे आम जनोंं  के लिए शासकीय सेवा छोड़ सक्रिय राजनीतिक सफर 1977 में शुरू हुआ, तब वे जनसंघ जिसके गिने चुने चंद कार्यकर्ताओं के साथ उस समय के सामान्य सूरजपुर विधानसभा क्षेत्र केे लगातार विधायक स्वर्गीय धीरेंद्र नाथ शर्मा को अपनी पहले चुनाव में ही काटे की टक्कर देते हुए मात्र 900 वोटों से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ जनसंघ और आज के भाजपा पार्टी के लिए उस दौर में संसाधनों का अभाव के बीच में एक पहचान स्थापित करते हुए 1977 में  बिधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री के साथ राज्यसभा सांसद तक के दायित्वों को निभाया है। उन्हें सूरजपुर क्षेत्र से कई गौरव प्राप्त हुआ.
सादा जीवन, हवाई चप्‍पल और सूती थैला अपने  राजनीतिक जीवन में स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह हमेशा  सादा जीवन शैली ही अपनाई. वे हमेशा ही परंपरागत परिधान में ही देखा जाता था . यहां तक कि वह हमेशा हवाई चप्‍पल ही पहनते रहे . वे अपने जीवन में केवल हर वर्ग चाहे वह उनका विरोधी भी इनके सरल सहज सादगी और दृढ़ इच्छाशक्ति के मुरीद थे ।उनके द्वारा किये गए कार्य और . उनके कंधे पर आमतौर पर एक सूती थैला भी नजर आता था , जो उनकी अलग पहचान बन गया था . जनसंघ से भाजपा तक का सफर भारतीय जनसंघ के स्थापना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारधारा से प्रभावित हो कर शासकीय सेवा को छोड़ उस समय में जनसंघ को स्थापित करने में इनका योगदान उल्लेखनीय रहा है जिसके बाद  जनसंघ से भाजपा  बनने के  बाद  मंडल स्तर से जिलाध्यक्ष  प्रदेश उपाध्यक्ष  और  छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने केेेे बाद प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व को निभाते हुए भारतीय जनता पार्टी के स्थापना और आज जिस स्थिति में है उसमें इनका योगदान के कारण ही आज भाजपा के कार्यकर्ता हर क्षेत्र में है । इस शख्सियत  की आज चतुर्थ पुण्यतिथि है भले यह इस दुनिया में नहीं है लेकिन लोगों की यादों में आज भी स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह का नाम जीवित हैं  और उनके कार्य हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा दायक रहेगा ।

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