: छत्तीसगढ़: घोटालों की जांच तो कल्लुरी करेंगे, कल्लुरी के अपराधों की जांच कौन करेगा?
Admin
Mon, Jan 14, 2019
तामेश्वर सिन्हा
रायपुर। “फाइलों से धूल हटाई और अभी से चीख-पुकार मचने लगी है”- ये बयान छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित नान घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिया गया है। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भूल गए हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में हुए घोटालों के फाइलों की धूल हटाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के सबसे चहेते और विवादित अफसर एएसआरपी कल्लुरी को जिम्मा क्यों सौपा गया है, जिन्होंने स्वयं कबूला था कि बस्तर के बेगुनाह आदिवासियों के घर में आग लगाने के लिए वे जिम्मेदार हैं? यही नहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फाइलों से धूल हटाने का काम नारायणपुर के एसपी आई कल्याण एलेसेला को भी सौंपा है जिन्होंने भरी सभा में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को ट्रक से कुचलने की बात रमन सिंह के कार्यकाल में स्वीकार की थी। तो ऐसे अफसर कांग्रेस सरकार द्वारा नॉन घोटाले में बनाई गई एसआईटी की टीम में हैं।
शायद भूपेश बघेल पूर्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए दिए गए बयानों को भूल गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि कल्लुरी जैसे भ्रष्ट अफसर को तुरंत सस्पेंड किया जाए और गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और अब मुख्यमंत्री बनते ही उन्हें अहम जिम्मेदारी देते हुए आंख का तारा बनाया जा रहा है। जिस अफसर को भूपेश बघेल जेल भेजना चाहते थे उसी अफसर को पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में हुए नान घोटाले की जांच का मुखिया बना दिया गया है।
बताते चलें कि आईजी एसआरपी कल्लुरी जब बस्तर में पदस्थ थे तब उन पर फर्जी मुठभेड़ों में आदिवासियों को मारने, फर्जी सरेंडर कराने, आगजनी जैसे आरोप लगे। इन मामलों में तब कांग्रेस हमेशा तत्कालीन भाजपा सरकार पर हमलावर रही। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहा करते हैं कि हमारी सरकार में मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का मौका दिया जाएगा,लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में मानवाधिकार अधिकारों की धज्जियां उड़ाने वाले अफसर अब भूपेश बघेल के सेलेक्टेड अफसर हैं।
ऐसी क्या मजबूरी है कि रमन सिंह के आंख के तारे रहे एसआरपी कल्लुरी को एसीबी चीफ और आई कल्याण एलेसेला को नान घोटाले में घटित एसआईटी टीम का सदस्य बनाया गया है? बस्तर में कार्यरत मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मानें तो ऐसे विवादित अफसरों को तो जेल में होना चाहिए?
बस्तर में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि हजारों आदिवासियों व जवानों को जनता के खिलाफ युद्ध मे झोंक कर मरने के लिए मजबूर करने वाले कल्लुरी ने खुद स्वीकार किया था कि उसने आदिवासियों के सैकड़ों घरों में आग लगवाया था, कई हत्या और बलात्कार के बहुचर्चित मामलों में उसे आरोपी माना जाता है।
भूपेश जी तब उन्हें खुद उसे सलाखों के पीछे देखना चाहते थे। बस्तर के आदिवासियों पर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कर कांग्रेस ने आदिवासियों का मन जीता था, अब उसी कल्लुरी को जिस पर खुद अरबों के भ्रष्टाचार का आरोप भी है सीधे आर्थिक अपराध ब्यूरो जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंप दिया गया है। यह घोर निराशाजनक है।
आज एक सप्ताह बाद भी सरकार के सलाहकार या खुद भूपेश इस निर्णय की जरूरत पर तर्क नही दे पाए हैं, इसलिए जनहित में लिए जा रहे अनेकों निर्णय के बावजूद यह घोर निराशाजनक और बस्तर तथा वहां ईमानदारी से पत्रकारिता करने वाले व मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी है। इससे आदिवासियों के विकास को लेकर सरकार की नीति संदेहास्पद हो गयी है। आप को बता दें कि छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों के बाद तमाम वादों के साथ सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तमाम फैसले काबिले तारीफ हैं चाहे वो टाटा द्वारा किसानों की अधिग्रीहत जमीन की वापसी का फैसला हो या किसानों के हित में लिए फैसले हों लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दागी अफसरों की नियुक्ति के मामले में कांग्रेस की सरकार की किरकिरी हो रही है। सरकार के इस फैसले ने सरकार की नियति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रख्यात समाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश कहते हैं कि-
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनने के साथ भूपेश बघेल ने जो शानदार तरीके से महत्वपूर्ण कदम उठाए उसके लिए उन्हें बहुत बहुत बधाई। लेकिन साथ ही उन्होंने एसआरपी कल्लुरी जैसे एक बदनाम और अपराधी किस्म के पुलिस अफसर को फिर से प्रतिष्ठा देकर जो नियुक्ति की है उससे मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत दुख हुआ क्योंकि बस्तर सुकमा से आगे डोलना पार में मेरे ऊपर जानलेवा हमला कराने के पीछे सबसे बड़ा हाथ एसआरपी कल्लुरी का था और जब मैंने इसकी शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह जी से की तो उन्होंने उसी रात 26 जुलाई, 2011 को उनका ट्रांसफर सरगुजा किया लेकिन बाद में दंतेवाड़ा के एसएसपी के बदले उन्हें पूरे बस्तर के पांचों जिलों का आईजी बना कर अत्याचार और अनाचार के लिए खुला छोड़ दिया।
उनकी वजह से वहां दहशत का माहौल फिर खड़ा हो गया और जो ज्यूडिशियल इंक्वायरी जगदलपुर में हाई कोर्ट के जज द्वारा हो रही थी वह बुरी तरह से प्रभावित है। मैंने अपने बयान में दर्ज कराया कि जब तक कल्लुरी यहां पर आईजी रहेगा तब तक आदिवासियों के लिए दूरदराज से आकर यहां अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं मिल पाएगा। जज महोदय ने कहा कि इस नियुक्ति या उनको बदलने में मैं कुछ नहीं कर सकता। सरकार का फैसला है। तभी मैंने कहा था कि यह पूरी की पूरी जांच की प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी निष्प्रभावी होगी क्योंकि मेरे ऊपर हमले का सारा का सारा अपराध कल्लुरी ने किया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में इस बात को उठाया था। दुर्भाग्य था कि यह कल्लुरी उस समय डॉ रमन सिंह की नाक का बाल बना हुआ था।
लेकिन मुझे आश्चर्य हो रहा है और दुख हो रहा है कि भूपेश बघेल जी ने अचानक यह कैसे निर्णय ले लिया क्योंकि वह स्वयं पहले कल्लुरी के खिलाफ बहुत तीखे बयान दे चुके हैं आज तो मौका था कि उसके ऊपर सख़्ती से जांच करवाते और उसकी जगह जेल में होती। बजाए उसके उन्होंने उसे प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिया। यह काम और कोई व्यक्ति भी कर सकता था।
छत्तीसगढ़ में चर्चा आम है कि ट्रक से कुचलने की बात कहने वाले आदिवासियों के घर को आग लगाने वाले अफसरों के भरोसे भूपेश बघेल नान घोटाले की जांच के लिए एसआईटी जांच टीम गठित किए हैं। हालांकि एसआरपी कल्लुरी की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपनी ही दलील है। बघेल कहते हैं कि सवाल घोड़े और घुड़सवार का है। रमन सिंह अधिकारियों के भरोसे चलते थे और अधिकारियों से कैसा काम लिया जाता है,यह हम लोगों को बेहतर आता है।
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