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: महिला सशक्तिकरण... सफलता की ओर ब़ढते क़दम

Admin

Wed, Aug 22, 2018
राजेश सोनी
सरगुजा-सशक्त महिला, सशक्त समाज' देश के विकास में दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। देश में महिलाओं का सशक्तिकरण होना आज की महती आवश्यकता है इसी दिशा बढते हुए महिला सशक्तिकरण की मिसाल कुछ ऐसा ही देखने को मिला है छ0ग0 के सरगुजा जिले के छोटे से ग्राम कुंवरपुर गाव मे,जहा पर जय मां दुर्गा महिला स्वंम सहायता समुह की महिलाओ ने तीन लाख रुपये की लोन लेकर धान की खेती कर ईट बनाकर अपनी आय मे ईजाफा किया ही साथ ही साथ गाव मे स्वछय भारत अभियान से जुडकर ग्रामीणो को शौचालय बनवाने और उपयोग करने के लिये प्रेरित किया! समुह की महिलाओ की इस पहल से न सिर्फ उन्हे आर्थिक रुप से मजबुत किया है बल्कि सरगुजा जिले का नाम भी रोशन किया है!
सरगुजा जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दुर ग्राम पंचायत कुंवरपुर गांव है,यहा 80 प्रतिशत आदिवासी जनजाति का बाहूल्य गांव है यहा के लोेगो की आमदनी का मुख्य जरीया कृषि है,,प्रशासनिक पहल पर जय मां दुर्गा महिला स्वंम सहायता समुह की महिलाओ को अच्छे कार्य के लिये उत्साहित करते हुये आवश्यक  प्रशिक्षण दिया,जिससे यह स्वंम सहायता समुह ने आत्मनिर्भर बनने और रोजगार सूजन की दिशा मे अपने प्रभावी कदम बढाते हुये तीन लाख रुपये का लोन लेकर समुह की महिलाओ ने आपस मे बाटकर रोजगार सृजन करते हुये अपने और अपने घर परिवार की आय मे ईजाफा करते हुये आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढने लगी है!
जय मां दुर्गा महिला स्वंम सहायता समूह की अध्यक्ष संतोषी विष्वकर्मा ने बताया कि जब वह इस गांव मे शादी होकर आई तो उनकी अर्थिक स्थिति काफी दयनिय थी,पति की आय कमजोर थी जिसके बाद समुह के बारे मे पता चलने पर वह समुह बनाकर धान की खेती किये साथ वह गांव मे ईट का निर्माण किया जिसका उपयोग गांव मे स्वच्छ भारत के तहत बनने वाले शौचालय मे उपयोग किया गया जिससे उन्हे अच्छा खासा मुनाफा मिला, कल तक वह छोटे से कच्चे के मकान मे रहती थी आज वह पक्के की सीट वाली मकान बनवा रही है,संतोषी बताती है उनके कार्य मे तकलीफे तो आई लेकन वह आगे बढती रही अपने समुह का सफलता पुर्वक संचालन करने बाद वे मास्टर टृेनर भी है अलग अलग गांव मे जाकर समुह का गठन भी करवाती है जनपद से उनको पैसा भी मिलता है उनकी सक्रिय भागदारी को देखते हुये उनको माईक्रो एटीएम का कार्य दिया गया है वे आसपास के गांव गांव जाकर पेशन वितरण के साथ आवास सहित मनरेगा का पैसा वितरण कर रही है जिसका उनको अलग से पैसा भी मिलता है! आज उनके समुह को सफलता पुर्वक संचालन को देखते देखते गांव मे 36 स्वंम सहायता बन गई है!
स्वंम सहायता समुह जैसा कि इसके नाम से इंगित होता है कि एक-दुसरे की आपस मे मदद करना है और कुंवरपुर गांव की इस समूह ने अपने नाम को सार्थक करते हुये अन्य स्वंम सहायता समूहो के लिये प्रेरणा का स्रोत बन गये है आज हर गांव मे समूह का विस्तार हो रहा है जिससे गांव मोहल्ले पारा टोले की जरुरतमंद महिलाये समूह से जुडकर रोजगार कर सके!

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