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: छ0ग0 के सूरजपुर जिले में भी मिलेगी आयुर्वेद चिकित्सा की सुविधा

Admin

Sat, Jun 2, 2018
सूरजपुर-केरल की सुप्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का सूरजपुर में अनुकरण किया जायेगा। केरल में प्रचलित पचंकर्म, योगा, फिजियोथेरेपी, होमियोपैथी समेत अन्य चिकित्सा सुविधाएं बहुत जल्दी ही सूरजपुर में भी लोगों को मिलेगी। 
सूरजपुर कलक्टर श्री के0सी0 देवसेनापति ने इसके लिए कई सार्थक पहल की है और पुराने चिकित्सालय परिसर को जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के रूप् में विकसित करने 1.13 करोड़ रूपये का आबंटन जारी किया है। उन्होंने बताया कि जिला गठन के बाद नया जिला चिकित्सालय बनकर तैयार हो गया है जून माह में जिला चिकित्सालय नये भवन में संचालित होने के बाद वर्तमान जिला चिकित्सालय खाली हो जायेगा। इस खाली परिसर की उपयोगिता बनाए रखने और जिलेवासियों को आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से इसे जिला आयुर्वेद चिकित्सालय बनाकर केरल की तर्ज में पीड़ितों का आयुर्वेद पद्धति से इलाज करने हेतु विकसित किया जायेगा। कलेक्टर श्री के0सी0 देवसेनापति एवं आयुर्वेद मेडिकल विशेषज्ञ डाॅ0 संध्या पाण्डेय ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है और इस दिशा में पहल भी शुरू कर दी है।
 
केरल से वापस लौटा अध्ययन दल
आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ0 संध्या पाण्डेय ने बताया कि कलक्टर के निर्देश पर आयुर्वेद चिकित्सकों का 6 सदस्यीय दल हाल ही में केरल से अध्ययन कर लौटा है। केरल के कोट्टक्कल स्थित आर्य वैद्यशाला, त्रिशुर स्थित वैद्यरत्न और कोथाट्टु कुलम स्थितधारियम् सस्ंथान पहंुचकर अध्ययन दल के सदस्य डाॅ0 संध्या पाण्डेय, डाॅ0 रजनीष जायसवाल, डाॅ0 श्रीकृष्ण त्रिपाठी, डाॅ0 आशुतोष सिंह एवं सिविल इंजिनियर डाॅ0 निखिल यादव ने वहाॅ संचालित चिकित्सा पद्धति, चिकित्सालय, उपकरण एवं उनका उपयोग, औषधि और उत्पादन विधि, चिकित्सालय का बाहरी और आंतरिक स्वरूप, मेडिकल वार्ड, सचांलन के तौर-तरीके, के अलावा अन्य आवश्यक विषयों व इकाईयों का अध्ययन कर सूरजपुर में वैसी ही सुविधाएं विकसित करने की बातें कहीं।
 
कलेक्टर ने दिये 1.13 करोड़ 
केरल के तर्ज में आयुर्वेद चिकित्सालय विकसित करने हेतु प्रारंभिक स्तर पर कलेक्टर खनिज विकास निधि से आयुर्वेद विभाग को 1.13 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया है। जिससे जिला चिकित्सालय परिसर को आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए तैयार किया जायेगा। चिकित्सालय परिसर की साज-सज्जा, वार्डों का नवीनीकरण, चिकित्सा उपकरण, औषधि, फर्नीचर, फर्शीकरण, पार्किंग, आधुनिक मशीनें, लैब और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रारंभिक व्यवस्था करने के उपरांत जिला मुख्यालय के समीप ही 5 एकड़ भूखण्ड में हर्बल पार्क बनाकर आयुर्वेदिक औषधि का उत्पादन का लक्ष्य भी रखा गया है। 
असाध्य रोगों का इलाज होगा संभव 
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति काफी कारगर और दुर्गामी परिणाम देने वाली सर्वोतम चिकित्सा पद्धति है। लम्बे समय से जो लोग रात रोग, पक्षाघात रोग, श्वसंन गत रोग, पाचन रोग, त्वचा आधारित रोग, मानसिक व्याधि, रक्तचाप, हृदयगत रोग, मधुमेह, लीवर, किड़नी समेत अन्य रोगों से परेशान है, एक सीमा में रहकर आयुर्वेद पद्धति से इनका ईलाज संभव है। सूरजपुर में शीघ्र ही यह सुविधा विकसित होगी। 
आयुर्वेद चिकित्सालय में होगी ये सुविधाएं 
छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विलुप्त प्राय है, लेकिन जो आयुर्वेद को बेहतर ढंग से जानते है वे ईलाज के लिए केरल का रूख करते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र की सबसे प्रभावी एवं कारगर विधि पंचकर्म, योग, फिजियोथेरपी, आयुर्वेद औषधि, हामियोपैथी जैसी उत्कृष्ठ चिकित्सा पद्धति सूरजपुर में विकसित होने के बाद लोग केरल जाना बंद कर देंगे। कलेक्टर श्री के0सी0 देवसेनापति ने दन्तेवाड़ा में भी आयुर्वेद चिकित्सालय को बढ़ावा दिया था। 
प्रदेश में बनेगी पहचान 
प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सालय तो है, लेकिन उच्च स्तरीय सुविधाओं वाला आयुर्वेद चिकित्सालय नहीं है, सूरजपुर मंे बनने वाला आयुर्वेद चिकित्सालय प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनायेगा। यहां वे सारी सुविधाएं होगी जो केरल के प्रसिद्ध संस्थानों में होती है। जिला चिकित्सालय के रूप में मान्यता हासिल कर यहां आयुर्वेद मेडिकल विशेषज्ञ, आयुर्वेद सर्जन के अलावा 4 आयुर्वेद चिकित्सक अधिकारी व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ-साथ होमियोपैथी चिकित्सकों की नियुक्ति व पदस्थापना की जायेगी। परिसर को आयुर्वेद चिकित्सालय हेतु अनुकूल संसाधनों से परिपूर्ण कर सुसज्जित किया जायेगा। 
केरल भेजा जायेगा प्रशिक्षण हेतु  
जिले में आयुर्वेद चिकित्सा को प्रभावी ढंग से संचालित करने की दृष्टि से आयुर्वेद चिकित्सा दल को विभिन्न विधाओं में दक्षता हासिल करने के लिए केरल की उच्च स्तरीय संस्थानों में प्रशिक्षण हेतु भेजा जायेगा। ताकि सूरजपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय में हर असाध्य बीमारियों का उपचार प्रभावी ढंग से हो सके। 
घर पहुंच उचार हेतु मोबाइल यूनिट 
आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ0 संध्या पाण्डेय ने बताया कि पंचकर्म जैसी चिकित्सा पद्धति से चिकित्सालय में उपचार तो होगा ही लेकिन ऐसे मरीज जो निःशक्त या शारिरीक कमजोरी के शिकार है, उनका ईलाज घर में ही करने के उद्देश्य से मोबाइल यूनिट विकसित करने की योजना है। इसके लिए पीड़ित परिवार से शुल्क लिया जायेगा और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ इसका संचालन करेगे।

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