सूरजपुर जिला जेल में बंदियों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण : अगरबत्ती और साबुन निर्माण से मुख्यधारा में लौटने की तैयारी
Rajesh Soni
Fri, Jul 3, 2026
सूरजपुर। जिला जेल सूरजपुर में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से 12 दिवसीय कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में 35 बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को अगरबत्ती और साबुन निर्माण की तकनीकी बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसमें कच्चे माल के चयन से लेकर उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक के गुर शामिल हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ बंदियों को वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सेवाओं और सरकारी स्वरोजगार योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम के शुभारंभ पर जेलर विक्रम गुप्ता ने कहा, "यह प्रशिक्षण बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और रिहाई के बाद उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। हम चाहते हैं कि वे अपनी सजा पूरी होने के बाद एक नई शुरुआत करें। लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर संदीप कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वरोजगार आज के समय में आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने बंदियों को बैंक द्वारा दी जाने वाली ऋण सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अशोक कुमार राणा ने बताया कि संस्थान का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने कहा, "जेल में आयोजित यह कार्यक्रम 'कौशल विकास से आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को सार्थक करने का एक प्रयास है।" प्रशिक्षण सत्र को सफल बनाने में RSETI के फैकल्टी सदस्य परमानंद और मयंक तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अतिरिक्त, ऑफिस असिस्टेंट अंकित गुप्ता, अजय कुमार और सुनील कुमार सहित जिला जेल प्रशासन के समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। प्रशिक्षण के बाद बंदियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जो भविष्य में उनके स्वयं का लघु उद्योग स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे। यह अनूठी पहल न केवल बंदियों के आत्मविश्वास को बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुन: स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।
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