: अचानकमार से लाये गए हाथी अब तमोर पिंगला में जंजीरों में कैद
Sun, Jun 3, 2018
राकेश मित्तल
प्रतापपुर
- सिविल बहादुर और सोनू.....अचानकमार अभ्यारण्य से तो आजाद हो गए लेकिन तमोरपिंगला के रेस्क्यू सेंटर में भी ये आजाद नहीं हैं और अधिकांश समय इन्हें जंजीरों में बांध कर कैद रखा जाता है।इनके लिए अब तक उचित चिकित्सीय व्यवस्था नहीं की गई है, घंटों उन्हें जंजीरों में बंधे होने के कारण अपने ही मलमूत्र में खड़े रहना पड़ता है,इनके साथ यहां हो रहा व्यवहार किसी प्रताड़ना से कम नहीं है।इन्हें तमोर पिंगला में रखा तो हाइकोर्ट के निर्देश पर है लेकिन अधिकारियों ने यहां भी न्यायालय के आदेश को ताक पर रख दिया है।
गौरतलब है कि अचनाकमार अभ्यारण्य में जंजीरों में बंधे सिविल बहादुर सहित अन्य हाथियों को आजाद करने के निर्देश के बाद सिविल बहादुर और सोनू नाम के हाथियों को
तमोरपिंगला अभ्यारण्य में बनाये गए पुनर्वास केंद्र रेस्क्यू सेंटर में पिछले महीने पांच मई को लाया गया था ताकि यहां आजाद रहकर स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकें।वाईल्ड लाईफ सरगुजा के साथ वन विभाग के अधिकारियों ने यहां भी हाइकोर्ट के आदेश को ताक में रख दिया है तथा यहां भी इनकी स्थिति अचानकमार से कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है,हाथी वहां भी कैद थे और यहां भी।हाइकोर्ट में याचिका का मुख्य बिंदु हाथियों को जंजीर में बांध कर रखना था जिससे वे प्रताड़ित हो रहे थे तथा शरीर के कई हिस्सों में गहरे घाव हो गए थे अब ऐसा ही कुछ अधिकारियों के रैवैये के कारण यहां भी हो रहा है।मिली जानकारी के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में भी दोनों हाथियों को कैद करके ही रखा है,ज्यादातर समय इन्हें जंजीर में बांध कर रखा जाता है,केवल कुछ समय के लिए इन्हें जंजीर से मुक्त किया जाता है जब महावत इन्हें रेस्क्यू सेंटर के अंदर घुमाते हैं तथा शाम होते ही जंजीरों में बांध दिया जाता है।बताया जा रहा है कि जंजीर बंधे होने के दौरान हाथी एक ही जगह पर खड़े या बैठे रहते हैं तथा आस पास स्वतन्त्र रूप से विचरण भी नहीं कर पाते।हाथी मलमूत्र वहीं पे करते हैं तथा मलमूत्र की गंदगी में ही उन्हें रहना पड़ता है जो उनमें कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं,जंजीरों में बंधे होने के कारण इनमें फिर से घाव जैसे निशान होने लगे हैं।अचनाकमार में इनके साथ हो रही प्रताड़ना से से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से तमोर पिंगला में इन्हें भेजा गया है लेकिन यहां भी इनका जीवन नरकीय हो गया है तथा जंजीर में बांध कैद करने के साथ रेस्क्यू सेंटर की छोटी सी जगह में इनके लिए प्रताड़ना से कम नहीं है,यहां भी अधिकारियों ने सिविल बहादुर और सोनू की स्वतंत्रता छीन ली है।वाईल्ड लाईफ और वन विभाग सरगुजा के अधिकारियों ने पूरे मामले में हाइकोर्ट के निर्देशों को भी ताक में रख दिया है,अचनाकमार में कैद हाथियों को स्वतन्त्र करने के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए रेस्क्यू सेंटर में फिर से कैद कर दिया है जहाँ सिविल बहादुर और सोनू प्रताड़ना के साथ नरकीय जीवन जी रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सिविल बहादुर और सोनू को जब से यहां लाया गया है तभी से इन्हें जंजीरों में बांध प्रताड़ित किया जा रहा है,यहां लाने के बाद सीसीएफ केके विसेन व अन्य द्वारा की गई पूजा के दौरान भी हाथी जंजीरों में ही बंधे हुए थे।
पहले दो हिरन मरे,अब हाथी घायल लेकिन नहीं चिकित्सक की सुविधा
तमोर पिंगला अभ्यारण्य में बने डिअर पार्क में अधिकारियों की लापरवाही और उचित इलाज के अभाव में कुछ दिनों पूर्व दो हिरनों की मौत हो चुकी है तथा अब रेस्क्यू सेंटर में सिविल बहादुर गम्भीर रूप से चोटिल है लेकिन वाईल्ड लाईफ सरगुजा वन्य प्राणियों की सुरक्षा को ताक में रख इन्हें उचित इलाज मुहैया नहीं करा रहा है,अब तक वन्य प्राणियों के दृष्टिकोण से विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं कर रहा है।सिविल बहादुर के टूटे हुए दांत के पास जबड़े और कान के बीच में कई दिनों से गहरा घाव है जिसे लेकर पहले तो यहां के अधिकारियों ने गम्भीरता नहीं दिखाई और जब बात बाहर फैलने लगी तो स्थानीय पशुचिकित्सक पांडे को बुलाकर इलाज के नाम पर औपचारिकता कर दी जबकि सिविल बहादुर को उच्च चिकित्सा की आवश्यकता है।
छोड़ना था जंगल में,कैद कर लिया रेस्क्यू सेंटर में
जंगली जानवर को बंधक बनाने के खिलाफ प्रस्तुत जनहित याचिका में कोर्ट ने राज्य शासन व वन विभाग को हाथी का उपचार कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने व उसके पुनर्वास के लिए विशेषज्ञों की सेवा लेने का आदेश दिया था। आदेश पर राज्य शासन ने सोनू हाथी के उपचार के लिए केरल के डॉ. राजीव टीएस व उनकी टीम की सेवा ली थी जो कॉलेज ऑफ वेटनरी एंड एनीमल साइंस के सेंटर फॉर स्टडीज ऑन एलीफेंट में सहायक प्राध्यापक व प्रोजेक्टर लीडर हैं। उन्होंने सोनू हाथी की जांच व उपचार के बाद जून 2016 में फिर से जंगल में छोड़ने की अनुशंसा की थी,इसके बावजूद उस समय उसे नहीं छोड़ा गया था। मामले की हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य शासन को सोनू हाथी को जंगल में छोड़ा जा सकता है या नहीं इस संबंध में विशेषज्ञों से जांच रिपोर्ट मांगी थी।दूसरी बार भी विशेषज्ञों ने सोनू को स्वस्थ्य होने और उसे जंगल में छोड़े जाने की बात कही थी।विशेषग्यों के राय के बाद कोर्ट ने हाथियों को स्वतन्त्र रूप से जंगल में छोड़ने की बात कही थी ताकि वे स्वतन्त्र रूप से अपना जीवन जी सकें लेकिन अधिकारियों ने जंगल में छोड़ने की बजाए रेस्क्यू सेंटर में कैद कर लिया है।
क्या कहा था कोर्ट के निर्देश पर बनी कमेटी ने
अचानकमार टाइगर रिजर्व में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा हाथियों को कई साल से जंजीरों से जकड़कर रखने के कारण उनके पैरों में घाव हो गए थे और उनमें से कई पैर से घसीटकर चल रहे थे। दायर याचिका के बाद हाथियों के हालात को जानने के लिए कोर्ट के निर्देश पर दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी जिसके बाद केंद्रीय एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट में कहा था कि हाथी के घावों को कम से कम दो बार पानी से धोना चाहिए। हाथी को कम से कम एक घंटा चलाया जाए। हाथी के लिए टेम्पररी शेड का निर्माण किया जाए। खून की जांच, किडनी का फंक्शन टेस्ट, लीवर फंक्शन टेस्ट, पेशाब की जांच हो। घाव ठीक होने के बाद हाथी को निर्धारित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए। राजू लाली और सिविल बहादुर की तुरंत चिकित्सीय जांच करवाने के बाद अनुभवी पशु चिकित्सक से जांच कराई जाए। हाथी को खुद की पेशाब और मल में खड़े रहना पड़ता है, वहां सफाई जरूरी है। हाथी का वैक्सीनेशन नहीं किया जा रहा है, इससे वह बीमार हो सकता है। जंग लगे बर्तन में पानी दिया जाता है, साफ-सुथरे बर्तनों में पानी दिया जाए।कमेटी ने कोर्ट को दी रिपोर्ट में इन सावधानियों का उल्लेख किया था जो हाथियों के लिए अति आवश्यक हैं लेकिन रेस्क्यू सेंटर में अधिकारियों ने उनके लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि है जो दोनों हाथियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
: नाली के ढक्कन में क्रेक ही क्रेक,जीएसबी और वेट मिक्स का लिया सैम्पल
Sun, Jun 3, 2018
राकेश मित्तलप्रतापपुर-अम्बिकापुर प्रतापपुर मार्ग में घटिया निर्माण किस हद तक हो रहा है यह जगन्नाथपुर के पास नाली निर्माण में देखा जा सकता है जहां बिना क्युरिंग के ढक्कन में क्रेक ही क्रेक हैं,शिकायतों के बाद तहसीलदार के नेतृत्व में पहुंची जांच टीम को निर्माण में कई अनियमितताएं मिलीं। कल्याणपुर के पास जीएसबी और वेट मिक्स का सैम्पल लिया गया,अधूरे पूलों को देखते हुए एक सप्ताह में पक्का डायवर्सन बनाने निर्देशित किया ताकि मार्ग अवरुद्ध न हो।वहीं जांच के दौरान मिले घटिया निर्माण पर कार्यवाही न होने पर शिकायतकर्ताओं ने फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है।
मिली जानकारी के अनुसार अम्बिकापुर प्रतापपुर मार्ग में सड़क विकास निगम और ठेकेदार द्वारा कराये जा रहे घटिया निर्माण के साथ विभिन्न अनियमितताओं की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने करते हुए घटिया मटेरियल के प्रयोग की पुनः सैम्पल जांच के लिए शपथ पत्र दिया था,कांग्रेस की ओर से नवीन जायसवाल,जगतलाल आयाम और प्रियंकल तिवारी ने भी घटिया गिट्टी,बिना मशीन के काम,धूल,सुरक्षा,जल संसाधन विभाग को पानी का भुगतान नहीं,खनिज विभाग की अनुमति के बिना मुर्रम उत्खनन,बालू निकालना,वन भूमि पर बिना अनुमति निर्माण सहित विभिन्न बिंदुओं पर जांच व उच्च क्वालिटी के निर्माण के लिए चक्का जाम की चेतावनी दी थी।इन शिकायतों के बाद एसडीएम प्रतापपुर ने तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित की थी जिसके बाद गुरुवार को तहसीलदार जेपी तिवारी,एसडीओ पीडब्ल्यूडी श्री राठौर,एसडीओ इर्रिगेशन सीएस ध्रुव ने मौके पर जाकर शिकायत कर्ताओं व सड़क विकास निगम की बीपीएम रश्मि वैश्य,श्री श्रीवास्तव व गांवर कंपनी के कर्मचारियों की उपस्थिति में जांच की।सबसे पहले उन्होंने कल्याणपुर के पास सड़क में डाली गई जीएसबी और वेट मिक्स की खुदाई कर सैम्पल लिया जिसे स्वतन्त्र रूप से जांच हेतु भेजा जाएगा,सड़क में पानी का छिड़काव नहीं पाया गया जो धूल का कारण बन रहा है। सड़क में वेटमिक्स डालने के लिए पेवर मशीन का प्रयोग किया जाना था जो नहीं पाया गया,खनिज विभाग से मुर्रम उत्खनन और पानी के लिए जल संसाधन विभाग से अनुमति के साथ टेक्स न देने की बातें सामने आईं।जगन्नाथपुर और प्रतापपुर क्षेत्र में पाईप शिफ़्टिंग होना नहीं पाया गया जिससे पेय जल सप्लाई बाधित हो गयी है।गोहगड़ नाला के साथ अन्य नदी नालों में पूल पुलियों का निर्माण बहुत ही धीमी गति से होना पाया गया जो आने वाली बारिश में रास्ता बंद होने का कारण बन सकता है जिस पर विभाग और ठेकेदार के कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गयी कि पूल पुलियों के पूर्ण होने का इंतज़ार न करें और एक सप्ताह के भीतर सभी जगह पक्की डायवर्सन सड़क बनाएं ताकि आवागमन बरसात में बन्द न हो और यदि ऐसा होता है विभाग और ठेकेदार को दोषी मां कार्यवाही की जाएगी। जांच के बाद तहसीलदार जेपी तिवारी ने बताया कि शिकायत कर्ताओं के सहमती से सड़क से लिया गया मटेरियल लैब में जांच हेतु भेजा जाएगा,खनिज विभाग,जलसंसाधन विभाग को पत्र लिख उनके द्वारा जारी आदेशों की कापी मांगी जाएगी,यदि उनसे अनुमति नहीं हुई है तो आवश्यक कार्यवाही की जाएगी,पीएचई पर अब तक पाईप शिफ़्टिंग न करने के मामले में कार्यवाही की जाएगी तथा पोल शिफ़्टिंग के मामले में भी जानकारी ले जांच कार्यवाही की जाएगी।कुछ जगहों पर अनियमितता मिली है जिसका प्रतिवेदन तैयार कर उच्च अधिकारियों को दिया जाएगा।
नाली के ढक्कन में क्रेक ही क्रेक,नहीं होती क्युरिंग
सड़क का निर्माण कितना घटिया हो रहा है इस बात का अन्दाजा जग्गन्नाथपुर के पास बन रही नालियों को देखकर लगाया जा सकता है,इनका निर्माण हुए एक हप्ता भी नहीं हुआ है और ढक्कन में क्रेक ही क्रेक है।जब यहां पर जांच टीम पहुंची तो क्रैक्स को देख भौंचक्के रह गए,कंसल्टेंट के कर्मचारी और ठेकेदार के कर्मचारियों ने बहाना ढूंढना चालू कर दिया और कहा कि निर्माण तो बहुत अच्छा है लेकिन क्युरिंग के कारण क्रैक्स आ गए हैं।उनकी बातें सुन तहसीलदार उनपर भड़क गए वहीं शिकायत कर्ताओं ने नाली तोड़ नव निर्माण की बात कही क्योंकि बिना क्युरिंग पूरी नाली घटिया और कमजोर हो गयी है,उन्होंने मौके पर नाली का नव निर्माण न कराने पर आंदोलन के साथ दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही।जांच कर रहे अधिकारी गांवर कम्पनी के अभिमन्यु कुमार के उस जवाब पर भी भड़क गए जब उसने कहा कि टैंकर नहीं था इसलिए क्युरिंग नहीं हुई,आज टैंकर मिला है तो पानी डलवा रहे हैं।बताया जा रहा है कि घटिया नाली को लेकर सड़क विकास निगम के अधिकारियों से ग्रामीणों की बहस भी हो चुकी है और अपनी कमी छिपाने वे ढक्कनों में घोला मरवा रहे थे जिसका भी ग्रामीणों ने विरोध किया था।
पूरी सड़क में सिर्फ एक टैंकर ही दिखा
जांच टीम ने प्रतापपुर से कल्याणपुर तक करीब तीस किमी की यात्रा की लेकिन कमाल की बात थी कि पूरी सड़क में एक ही टैंकर दिखाई दिया। धूल से राहत दिलाने न सड़क में पानी डाला जा रहा है और न ही पक्के कामों जैसे पुल पुलियों और नालियों में क्युरिंग की जा रही है। चूंकि आज जांच टीम जानी थी इसलिए एक टैंकर जगन्नाथपुर भेज दिया गया था जो सर्फ औपचारिकता के लिए ढक्कनों में पानी डाल रहा था,जांच टीम के सामने गांवर कम्पनी के अभिमन्यु ने भी टैंकर न होने की बात स्वीकार की।
सैम्पल के समय ना नुकुर करते आये अधिकारी
जांच टीम शिकायतकर्ताओं के साथ कल्याणपुर के पास जब मटेरियल का सैम्पल ले रही थी तो सड़क विकास निगम की रश्मि वैश्य ना नुकुर करती नजर आईं,घटिया मटेरियल होबे का डर उनके चेहरे और बातों से साफ झलक रहा था।शिकायतकर्ता अपने लिए अलग से सैम्पल की मांग कर रहे थे ताकि वे स्वतन्त्र लैब में जांच करा सकें लेकिन रश्मि वैश्य जांच टीम को समझाने में लग गईं फिर जब शिकायत कर्ताओं के अनुसार लैब में जांच होने की बात तहसीलदार ने कही तब एक ही सैम्पल दोनों जीएसबी और वेटमिक्स का लिया गया।गौरतलब है कि सड़क में चुना का पत्थर युक्त घटिया गिट्टी और फर्जी टेस्ट रिपोर्ट लगाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
सड़क विकास निगम घटिया निर्माण से झाड़ते नजर आया पल्ला
जांच के दौरान एक और बात कमाल की सामने आई जब सड़क विकास निगम के अधिकारी ही घटिया निर्माण से अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। जगन्नाथपुर में घटिया नाली की बात पर सड़क विकास निगम के श्री श्रीवास्तव ने कहा कि उनका काम तो सिर्फ नजर रखना है पूरी जवाबदारी कंसल्टेंट और ठेकेदार की है।
: डायरिया का प्रकोप एक की मौत 60 हैं पीड़ित मचा हडंकंप
Sat, Jun 2, 2018
शमरोज खान संवाददाता सुरजपुर
दूषित पानी से डायरिया फैलने की स्वास्थ्य टीम ने जताई आशंका, पानी का सैम्पल जांच के लिए भेजा गया
सूरजपुर
- जिला मुख्यालय से लगे ग्राम बसदेई में डायरिया के प्रकोप से 66 लोग पीडि़त पाए गए हैं। तो वही एक बुजुर्ग की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला चिकित्सालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बसदेई के अलावा प्रभावित रजवारीपारा मोहल्ले में शिविर लगाकर प्रभावितों का उपचार किया जा रहा है। सीएमएचओ ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा करते हुए गांव में क्लोरिन की गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर बांटने के निर्देश दिए हैं।
आदर्श ग्राम बसदेई के रजवारीपारा, पटेलपारा और देवल्लापारा में डायरिया की चपेट में आकर अब तक 66 लोग उल्टी-दस्त और पेट दर्द से पीडि़त हैं। वहीं रजवारीपारा मोहल्ला निवासी खुशियाल राजवाड़े पिता रूपसाय राजवाड़े उम्र 60 वर्ष की शनिवार की दोपहर जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई।
बसदेई में उल्टी दस्त का प्रकोप तो विगत 30 मई से ही शुरू हो गया था। 30 मई को एक-एक कर 4 मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बसदेई में उपचार के लिए पहुंचे थे। फिर क्रमश: 31 मई और 1 जून को जब इनकी संख्या 30 पहुंच गई तो स्वास्थ्य अमला सक्रिय हुआ।उन्होंने जिला चिकित्सालय और स्वास्थ्य केन्द्र बसदेई के अलावा प्रभावित मोहल्ले में ही स्वास्थ्य शिविर लगाकर उपचार करने की पहल की। 2 जून को तो मरीजों की संख्या बढ़कर 6६ तक पहुंच गई। इनमें 30 मरीज जिला चिकित्सालय में भर्ती किए गए, जहां एक की मौत उपचार के दौरान हो गई।
विभागीय अधिकारियों ने शिविर स्थल का लिया जायजा
बसदेई के रजवारीपारा में उल्टी दस्त पीडि़तों की संख्या में लगातार इजाफा होने की सूचना पर शनिवार को सीएमएचओ डॉ. एसपी वैश्य, बीएमओ डॉ. आरएस सिंह, डॉ. गरिमा सिंह, जिला पंचायत सदस्य पंकज तिवारी सहित पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों ने शिविर में पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लिया और डायरिया नियंत्रण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीएमएचओ डॉ. वैश्य ने संभावना जताई कि पीने के पानी से डायरिया फैला है। इसलिए उन्होंने हैण्डपम्प व कुएं में क्लोरिन की गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं।
पानी टंकी की 18 साल से नहीं हुई सफाई
ग्रामीणों से चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि बसदेई में पंचायत द्वारा संचालित नल जल योजना के तहत आबंटित नल कनेक्शन का पानी इस्तेमाल किया जाता है और इस इकाई की पानी टंकी की सफाई 18 वर्ष से नहीं हुई है। वहीं कुएं में जगत न होने के कारण बाहरी कचरा कुएं में गिरने से बैक्टीरिया के रूप में पानी को दूषित कर रहा है।उन्होंने पानी टंकी और हैण्डपम्प सहित सभी कुओं के पानी का सैम्पल लेकर जांच कराने के लिए निर्देश दिए हैं। चिकित्सकों के निर्देश पर स्थानीय स्वास्थ्य अमले ने पानी का सैंपल लेकर पीएचई विभाग को जांच के लिए भेजा है।
बसदेई को मिलेगा एमबीबीएस डॉक्टर
बसदेई में डायरिया के प्रकोप का जायजा लेने पहुंचे सीएमएचओ डॉ. एसपी वैश्य ग्रामीणों से जब चर्चा कर रहे थे तो ग्रामीणों ने बसदेई स्वास्थ्य केन्द्र में एमबीबीएस चिकित्सक तैनात करने की मांग रखी। इस पर सीएमएचओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि दो दिन के अंदर बसदेई को एमबीबीएस डॉक्टर मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में सूरजपुर जिले को तीन नए चिकित्सक मिले हैं। उनमें से एक चिकित्सक की पदस्थापना बसदेई कर दी जाएगी।
नियंत्रण में है स्थिति
बसदेई में डायरिया का प्रकोप तो है लेकिन स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है, डायरिया के कारणों का पता लगाया जा रहा है। बैक्टीरिया की जांच के लिए विभिन्न प्रकार के सैम्पल जुटाए जा रहे हैं। गांव में स्थिति को नियंत्रित करने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य शिविर लगाकर अमले द्वारा लोगों के घर में ही उपचार किया जा रहा है। बचाव हेतु जो भी जरूरी होगा वे सारी व्यवस्थाएं कर ली जाएंगी।
डॉ. एसपी वैश्य, सीएमएचओ सूरजपुर