ब्रेकिंग

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन, सांसद चिंतामणि महाराज होंगे मुख्य अतिथि

2 साल से शोपीस बने हैं करोड़ों के BSNL टावर

कोर्ट से लौट रहे ग्रामीण की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या; एक आरोपी गिरफ्तार, 4 फरार

प्रेम विवाह के 15 साल बाद पति ने दी बेरहमी की हदें पार, बाल काटकर दी जान से मारने की धमकी

घोषणा विष्णुदेव साय की, भुगत रहे किसा, डेढ़ साल बाद भी बिहारपुर बैंक शाखा का अता-पता नहीं

सूचना

: ये हौसलों की उड़ान है.. पूर्णिमा

Admin

Tue, Jul 17, 2018

तोड़ समाज के वो सारे रुड़ीवादी बंधन,आगे बढ़कर किया है हर चुनौतियों का सामना बुलंद हौसलों के समाने ठीक न सका सामाजिक बेड़ियों का जकड़न,मिशाल हूँ शक्तिस्वरूपा हूँ उन सामाजिक कुरीतियों के लिए,जिन्होंने बाट के रखे है लडकियों के दायरे...

निशा मसीह

रायगढ़-आज हम एक येसी लड़की की कहानी से रूबरू करने जा रहे है जो  हर मुश्किलों से लड़ते हुए अपने मुकाम तक पहुची बस अपने ख्वाहिसों से अभी  एक कदम दूर है वो.. 

वैसे तो जिस ग्रामीण परिवेश में रहती है वो वहा लडकियों का गाँव से बाहर जाकर पढ़ना या नौकरी करना समाज से बैर करने के बराबर है,अगर कोई लड़की समाज के बनाये गए नियमो को तोड़कर कुछ करती ही तो पूरा समाज उसके परिवार के खिलाफ हो जाता है समाज का कोई भी व्यक्ति एसे परिवार से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखता,एक प्रकार से इसे सामाजिक बहिष्कार भी कह सकते है|पर आज कहानी ही कुछ अलग है कैसे ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी पूर्णिमा ने अपने सपनो को न केवल साकार किया बल्कि उन लडकियों के लिए मिशाल बनी जो आज भी सामाजिक बन्धनों  के कैद मे है|रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा के ग्राम पतरापाली की रहने वाली पूर्णिमा चौहान मजदूरी करने वाले परिवार से है,पूर्णिमा आपने छह भाई बहनों में सबसे छोटी है और पूरे परिवर की लाडली भी है ,दो भाई और चार बहने है पूर्णिमा की,पिता दूजराम चौहान दूसरो के यहाँ खेती बाड़ी और मजदूरी का काम करते है वही उनकी माँ घर सम्हालती है |परिवार में स्थायी आय नहीं होने के कारण पूर्णिमा के भाई बहन केवल पाचवी,आठवी तक ही पढ़ाई कर पाए,पर पूर्णिमा ने बारहवी तक की पढाई की वो भी अच्छे नम्बरों से पास हुई,पूर्णिमा आगे की पढाई करना चाहती थी लेकिन आर्थिक स्थिति येसी नहीं थी की वो आगे पढ़ सके |स्कूल की पढ़ाई ख़त्म होने के बाद पूर्णिमा ने सोलह साल की उम्र से खेतो में काम करने लगी वही  गाव में जो काम मिलता वो पूर्णिमा करती चाहे वो खेत में रोपा लगाने का काम हो या धान काटने का,मेहनतकरने से वो कभी पीछे नहीं हटी,बस उसके दिमाग में आगे पढ़ने का ख्याल और पारिवारिक स्थिति ठीक करने की बाते घुमती रहती थी पूर्णिमा पुलिस बनना चाहती थी ये उसके बचपन के सपने थे|बस जिन्दगी कुछ दिनों तक एसे ही गुजरने लगी पर भगवान् ने पूर्णिमा के लिए कुछ और ही सोच रखा था वो पूर्णिमा को एक सुनहरा अवसर देने वाले थे और वो ये था की एक दिन गाव में ग्रामसभा की बैठक हुई उस बैठक में पूर्णिमा के बड़े पिताजी के बेटे जगतराम चौहान भी गए थे उस ग्रामसभा में सरकार के विभिन्न योजाओ की जानकारी दी जा रही थी की ग्रामीण कैसे उसका लाभ ले सके जिसमे एक जानकारी पूर्णिमा के काम की थी जिसने आने वाले वक्त मेंउसकी जिन्दगी बदल दी उस ग्रामसभा में लाईवलीहुड कालेज की जानकारी दी गई की कैसे युवा वर्ग यह से ट्रेनिग लेकर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दे सकते है|पूर्णिमा के बड़े भाई ने बिना समय गवाए पूर्णिमा के घर पहुँच गए और जब जगतराम ने पूर्णिमा के लिए परिवार वालो से लाईवलीहुड कालेज और वहा के प्रशिक्षण की जानकारी दी ये भी बताया की कोई खर्चा नहीं लगेगा सारा खर्च सरकार करेगी, पूर्णिमा को वहा भेजे पर कहते है न अच्छे काम के समय हजारो दिक्कते भी साथ आती है  लड़की का बाहार रहकर प्रशिक्षण लेना परिवार वालो को पसंद नहीं आया एक लड़की का गाव समाज से बाहार रहकर पढ़ना ये ठीक नहीं है परिवार वाले तो विरोध कर ही रहे थे साथ ही समाज के लोगो ने भी इसका विरोध किया समाज के लोगो ने यह तक कह दिया की पूर्णिमा बाहर जाएगी तो समाज का कोई भी व्यक्ति उनका साथ नहीं देगा याने परिवार का गाव में हुक्का पानी बंद|लेकिन पूर्णिमा के बड़े भाई ने इसकी परवाह नहीं की और उन्होंने समाज के लोगो को और परिवार को बहोत समझया मिन्नते की वही पूर्णिमा ने भी परिवार वालो को समझया मिन्नते की,पूर्णिमा किसी भी हालत में ये सुनहरा और कीमती मौका गवाना नहीं चाहती थी उसके इस कदम से उन सभी लडकियों के लिए दरवाजे खोलना था जो आज भी कही न कही समाज के डर से कुछ नहीं कर पाती आगे नहीं बढ़ पाती|दोनों ने  भाई बहन ने काफी  समझया सबको और ले देके पूर्णिमा के पिता राजी हुए और पूर्णिमा के भाई और पिता दोनों रायगढ़ के लाईवलीहुड कालेज गए और सोनू मैडम से मिले मैडम की बातो से पूर्णिमा  के पिता काफी प्रभावित हुए और उनकी बेटियों को लेके जो सोच थी पूरी बदल गई और वो ट्रेनिग के लिए तैयार  हो गये,सोनू मैडम गाँव आई सबको समझाया, पूर्णिमा की माँ काफी चिंतित थी की कैसे वो अपनी बेटी को बहार भेजे अंजान लोगो के बीच पर सोनू मैडम ने ये चिंता भी दूर कर दी ,अब पूरा परिवार पूर्णिमा के साथ था,पर कहते है न जब कुछ अच्छा होता है तो शगुन का काला टिका लगना भी जरूरी होता है और वो टिका था सामाज की बेड़िया,फिर से गाँव  वालो का विरोध जो पूर्णिमा के सपनो के  बीच का रोड़ा बनने लगे,समाज वाले विरोध करने लगे काफी बाते हुई पर इस बार पूर्णिमा के पिता ने हिम्मत दिखाई और भेज दिया पूर्णिमा को ट्रेनिग के लिए रायगढ़|पूर्णिमा की माँ रमला ने पूर्णिमा को जाते समय कुछ सिख दी की बेटी  कोई गलत काम न करना अपने लक्ष्य पर ध्यान देना,एसा काम करना जिससे तेरे  पिता सब गाँव  वालो को बोल सके की मेरी बेटी मेरे बेटे के समान है और पूर्णिमा ने अपनी माँ की सिख को गाँठ बंधते हुए निकल पड़ी बुलंद हौसलों के साथ अपना और अपने गाँव का नाम रौशन करने के लिए |

पूर्णिमा आजाद है अपने सपनो को बुनने के लिए जैसा चाहे वैसा रंग भर सकती है अपने जीवन में,उसे पता था की उसे क्या करना क्योकि जानती थी किन समस्याओ और विरोध का सामना करके वो यह तक पहुची है,पूर्णिमा ने लाईवलीहुड कालेज से फ्रंट रिसेप्सनिस्ट का तिन महीने का कोर्स किया वही शहर के बड़े बड़े होटलों में ट्रेनिग होती थी और वही से ट्रेनरो को नौकरी के आफर भी मिल रहे थे पर पूर्णिमा को कोई आफर नहीं आया हर बार यही कह जाता अगली बार जरुर,नौकरी नहीं लगने के कारण पूर्णिमा वापस अपने गाँव पतरापाली आ गई,यहा भी लोगो ने ताना मारना शुरू कर दिया पर वो सब कुछ सहती रही अपने अच्छे पल के आने के इन्तजार में उसका हौसला बुलन्द था उसे पता था एक न एक दिन वो जरुर अपने आपको साबित करेगी और वो दिन जल्द आ गया दो महीने बाद पूर्णिमा को रायपुर के मेग्नेटो माल के मेक्डोनल्स से नौकरी  के लिए नितिन सर कॉल आया नितिन सर वो है जो हर समय पूर्णिमा गाइड करते है,फिर परिवार वालो ने घर से बहार जाकर काम कारने की असहमति जताई फिर काफी मस्कत के बाद परिवार वालो ने उसका साथ दिया और पूर्णिमा ने  रायपुर जाकर मेक्डोनल्स में  ट्रेनी क्रू के पद पर  नौकरी शुरू कर दी और उसे महीने का तिन हजार तो किसी महीने पांच हजार मिलने लगा वेतन फिक्स नहीं था |कम्पनी काम में अधिक बेहतरी के लिए पूर्णिमा को ट्रेनिग के लिए इंदौर भेजा पर फिर समाज वालो ने यहा असहमति जताई इसके बावजूद उसके पिता ने साथ देते हुए ट्रेंनिग के लिए भेज दिया,बीस दिन की ट्रेंनिग के बाद इंदौर से लौटने के बाद पूर्णिमा ट्रेनी स्काट के पद पर काम करने लगी  अब उसे लगभग नौ हजार महीने का मिलने लगा,इसी बीच पूर्णिमा के साथ सड़क हादसा हो गया जिसमे उसका बया पैर टूट गया आपरेशन में लगभग डेढ़ लाख का खर्च हुआ जो पैसे उसने बचत से बचाए थे और कुछ पिता ने कर्ज लेकर इसके  साथ ही उसकी कंपनी ने भी उसकी मदद की,पांच महीने  काम छोड़कर पूर्णिमा को  घर में रहना पड़ा,पर कहते है असफलता महज एक अवसर है अच्छी शुरुआत के लिए पूर्णिमा में कुछ तो था फिर पंख मिल गए आसमान में उड़ने के लिए और अब ये एसी उड़न थी जो पीछे मुड़ने के लिए नहीं बल्कि आगे ही आगे बढ़ने के लिए,पूर्णिमा वापस काम पर गई और नाये जोश और उत्साह के साथ काम करना शुरू किया उसकी इस मेहनत और लगन को देखते हुए कंपनी ने उसे पुणे भेजा ट्रेंनिग के लिए जंहा वो सलेक्ट हो गई बतौर फ्लोर मनेजर के पद के लिए आज पूर्णिमा आत्मविस्वास से भरी है और चालीस कर्मचारियों को लीड करती है महीने का आज वो पंद्रह हजार कमा रही है!

बीस साल की पूर्णिमा काम के साथ साथ बीए प्रथम बर्ष की प्राइवेट पढ़ाई कर रही है रविशंकर विश्वविद्यालय से,रायपुर में किराये में रहती है और आपने कमाए  पैसे से जो कर्जे लिए थे सारे चूका कर  परिवार की मदद कर रही है अपनी प्रेरणा वो अपने सर राजबीर सिंह को मानती है जो  मेक्डोनल्स में आर एम की पोस्ट पर है वही पूर्णिमा भी आरएम बनना चाहती है अभी वो इस पोस्ट के लिए बस एक कदम ही पीछे है,वही सोनू मैडम जिन्होंने  हर परिस्थितयो में पूर्णिमा का साथ दिया उनका हौसला बढाया,वो उनकी अच्छी दोस्त की तरह रही  उसका ख्याल रखा और आज भी पूर्णिमा उनके मार्गदर्शन पर चलती है,और सबसे बड़ा श्रेय वो आपने बड़े पिताजी के बेटे जगत भैया को देती है आज उन्ही के प्रयास से वो इस मुकाम तक पहुची है,पूर्णिमा सलाम करती है आपके पिता को जिन्होंने दकियानूसी परम्पराओ को पीछे छोड़कर अपनी बेटी का साथ दिया अपनी सोच बदली लडकियों के प्रति समाज से लड़कर हमेशा साथ दिया,वही पूरा परिवार भी पूर्णिमा के हर कठिन वक्त पर साथ निभाया|पूर्णिमा और उसका परिवार लाईवलीहुड कालेज सभी सर मैडम का आभार व्यक्त करता है जनके कारण पूर्णिमा को इस लायक बनाया जिससे उसकी जिदगी को दिशा मिली वही परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है|पूर्णिमा कहती है जो लोग उच्च शिक्षा से वंचित हो गए है उनके लिए सरकार की बहोत सारी योजनाये है जिनका लाभ लेके वो अपना भविष्य गढ़ सकते है   

 पूर्णिमा उन लडकियों के लिए प्रेरणा है जो कठिनइयो के डर से हार मान लेती है,पूर्णिमा के इस कदम से कही और तो नही पर उसके गाँव और समाज वाले पूर्णिमा को समझे और अपने गाँव की लडकियों को बेहतर भविष्य दे सफल बनाये लडकियों को आगे बढाये|

छोटे से गाँव में रहने वाली पूर्णिमा जिसे अपनी पढाई अधूरी छोड़नी पड़ी,अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की सीढ़ी चढ़ाती जा रही है ट्रेनी क्रू से पद पर 5000 से शुरुआत करते हुए आज पूर्णिमा फ्लोर मेनेजर के पद पर पदस्थ है आज को महीने का 15000 प्रतिमाह कमा रही है इसके साथ ही वो 40 कर्चारियो को लीड करती है

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें