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: खतरों के बीच पढते नोनिहाल...आफिस व कमरे का छत गिरा…अधिकारी चैन की बंशी बजाते रहे…अब बरामदा भी गिरने वाला है…जर्जर हुई स्कुल में बच्चे जान जोखिम में डालकर कर रहे पढ़ाई….कभी भी ढह सकता है स्कुल भवन…

Admin

Fri, Aug 13, 2021

राजेश सोनी/ प्रियांशु यादव
सूरजपुर ओडगी. शिक्षा मंत्री के जिले के स्कुलो का हाल बदहाल है जिसे देखने वाले अधिकारी व जनप्रतिनिधि मुकदर्शक बने हुये है शायद वे भी किसी हादसे का इंतजार कर रहे होगे. स्कुल में पढ़ने वाले बच्चो की सुरक्षा की जरा सा भी परवाह नहीं है. स्कुल कक्ष की छत टुटकर गिर गई, बच्चे भाग्यशाली रहे, आफिस की प्लास्टर गिर गया शिक्षक बच गये, अब बरामदा गिरने वाला है. तीन वर्षो से छत गिरने में लगा है कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकता है. कई अधिकारी आये और देखकर चले गये तो वही इसकी जानकारी भी दिया गया पर मलाईदार कुर्सी से चिपके लापरवाह अधिकारी को अपने छात्र छात्राओ की जान तक की कोई परवाह नही है. स्कुल के प्रधान पाठक की मजबुरी है कि स्कुल इस जर्जर भवन में लगाना पड रहा है. यह पुरा मामला ओड़गी ब्लाक के दूरस्थ गांव आनंदपुर का प्राथमिक शाला है जहा का स्कुल भवन जर्जर हो गया है दो दिन पहले स्कूल का एक कमरे का प्लास्टर गिर चुका है वही बचे तीन कमरों की छतों में भी दरारें आ गई हैं स्कुल का आफिस भी हाल बेहाल है ऐसे में कभी भी भवन गिर सकता है बहरहाल स्कुल में 53 बच्चे अपना जान खतरे के डाल कर पढ रहे है. किसी भी दिन कुछ भी हो सकता है बच्चों की जान को हर समय खतरा बना रहता है. जबकि स्कुल के शिक्षक ने पुरे मामले की जानकारी अपने उच्चधिकारी को पहले ही दे दिया है.

स्कुल में पढते बच्चो की

लिखा जा चुका है पत्र परंतु कोई कार्रवाई नहीं
ओडगी विकास खंड शिक्षा अधिकारी को कई बार पत्र लिखकर भेजा है पिछले वर्ष निरिक्षण करने भी आये थे. हाल फिलहाल में संकुल प्रभारी आये थे. जर्जर हो चुके स्कुल का हाल खुद देख चुके है लेकिन किसी तरह का कोई पहल नही किया जा रहा है.प्राथमिक शाला आनंदपुर के प्रधान पाठक सुधाकर प्रसाद का कहना है. वे छात्रों को भवन में बैठाने के लिए मजबूर हैं खुद उनके आफिस कक्ष, स्कुल कक्ष का छत धरासाई हो गया है बरामदा भी गिरने वाला है. उन्होंने बताया कि विभाग को इस संबंध में कई बताया जा चुका है.
अभिभावक हैं डरे हुए
इस स्कुल में पढने वाले बच्चो के अभिभावक चिंतित हैं. उनके छोटे-छोटे बच्चे वहां पढ़ाई करने सुबह जाते हैं और जर्जर स्कूल भवन पढते हैं बराबर अनहोनी होने का डर बना रहता है. इस विषय पर जिम्मेदार जिला शिक्षा अधिकारी सहित ब्लाक शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश किया पर उन्होने फोन उठाना उचित नही समझा.


देवलोक वाणी
वक्त बदला.सत्ता बदली. निजाम बदला. लेकिन हालात नही बदले….तो वही भ्रष्टाचार मिटाने चले थे आज उन्ही की जागीर बनी…

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