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: जिला अस्पताल की गुटबाजी असर स्वास्थ व्यव्स्था पर....प्रशासन बना मुकदर्शक....

Admin

Fri, Apr 23, 2021

राजेश सोनी
सूरजपुर-जिले में कोरोना की दूसरी लहर इस कदर बेकाबू है कि प्रतिदिन न केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है बल्कि मौत के आंकड़े भी लोगो को डरा रहे है आज 440 कोरोना संक्रमित के साथ 3 की मौत हुई. 13 अप्रैल से लगाये गये लाक डाउन मे ही अब तक 25 लोगो की मौते हो चुकी तो वही 3199 कोरोना संक्रमित मरीज पाये गये. अप्रैल माह मे अब तक 4800 कोरोना संक्रमित पाये जाने के साथ 31 मौत हो चुकी है. जिले की स्वास्थ व्यवस्थाएं भी ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है. कुछ दिनो पहले आक्सीजन प्लांट के पाईप फटने 7 घंटो तक प्लांट से कोविड अस्पताल तक सप्लाई बंद रहा हालाकि तत्काल जिला अस्पताल में उपलब्ध आक्सीजन से बैकप दिया गया जिससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति नही बनी. तो वही स्वास्थ विभाग की लचर व्यव्स्थाओ से तंग आकर जिला प्रशासन ने प्रतिदिन प्लांट की निगरानी के लिये अनुविभागिय अधिकारी की नियुक्ति किया है बहरहाल स्वास्थ विभाग में चल रहे गुटबाजी का असर स्वास्थ सेवाओ के साथ व्यव्स्थाओ पर पड रही है जिससे स्वास्थ व्यव्स्था बेलगाम हो गया है.
गुटबाजी का असर स्वास्थ व्यव्स्थाओ पर
जिला अस्पताल के साथ कोविड अस्पताल में इंमरजेसी संसाधन उपलब्ध होने के बावजुद संचालित नही होना. ऐसे कई बाते सामने आती जाती रहती है जो गुटबाजी की संकेत है भाजपा की सत्ता से हटते ही पूर्व सीएमएचओ एसपी वैश्य के सेवा निवृत के बाद प्रेमनगर विधायक खेलसाय सिह ने सत्ता के दम पर अपने दामाद डाक्टर आर एस सिह को प्रभारी सीएमएचओ बनाया है काग्रेस सत्ता के इस कृत्य से जुनियर डाक्टर को बडी जिम्मेदारी वह भी सीनियर के रहते ऐसे में इसका असर स्वास्थ सेवाओ पर दिखने लगा. गुटबाजी से अवगत होते पूर्व कलेक्टर दिपक सोनी ने कोविड अस्पताल की आवश्यक व्यव्स्थाये बनाने संचालित करने के लिये सीनियर महिला डाक्टर को जिम्मेदारी दिया गया तो वही उनके जाने के बाद नये कलेक्टर ने प्रभारी सीएमएचओ तहजीत दिया जिससे स्वास्थ व्यव्स्थाए बिना कट्रोल के लडखडाती रही. आलम यह है कि कोविड टेस्टिंग वाली जगह पर टेस्ट कराने आने वाले लोगो को धुप से बचाने के लिये कनात लगावाने में एक गुट दुसरे गुट को देखता रहा जिससे कई दिनो बाद आखिरकार टेस्टिंग स्थल पर कनात लग पाया है.
अव्यव्स्था का आलम
कोरोना संक्रमित मरीजो उपचार में किस कदर लापरवाही बरती जा रही यह कोरोना के मरीज खुद सामने आकर बता रहे है एक बेड पर दो मरीज है तो वही कई मरीज चटाई में है. गभीर स्थिति में होने पर डाक्टर फोन तक नही उठाते. एक मरीज की हालत यह है कि दो दो टेस्ट मे कोविड नही पाया गया फिर भी उसे कोविड में भर्ती कर उपचार किया गया जिससे मरीज की हालत गंभीर होने पर परिजनो ने अंबिकापुर मिशन अस्पताल दाखिल कराया गया. तो वही महिला बाल विकास से फिड बैकअप जानने के लिये फोन किये जाने पर परिजन कोविड अस्पताल की उपचार पर सवाल खडे करते हुये जमकर लताड लगा रहे है.
बिना कंट्रोल का कोविड अस्पताल
पूर्व कलेक्टर ने तीन मंजीला शिशु महिला स्वास्थ अस्पताल के नवनिर्माण भवन को कोविड 19 महामारी को देखते हुये इसे कोविड ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया. सुविधाओ की बात करे तो 10 आईसीयू, 15 एचडीयू, 100 बेड है इसके अतिरिक्त सेट्रल आक्सीजन, जनरल बेड, इंटरनेट, सीसीटिवी सहित अन्य सुविधाये उपलब्ध है साथ ही अस्पताल की गतिविधियो पर नजर बनाने के लिये कंट्रोल रुम बनाये गये थे बहरहाल अस्पताल का कंट्रोल ही गायब अदृष्य है.
पेयजल लिये परेशान मरीज
कोविड अस्पताल में तमाम तरह की परेशानियो के साथ पेयजल भी नही मिल पा रहा है पेयजल के लिये ग्रांउड फ्लोर मे लगाये गये वाटर मशीन से पानी नही निकलता है जिससे मरीजो के परिजन पेयजल भेजते है. अव्यव्स्था का आलम यह है कि ना तो बेड सीट बदला जाता है ना ही सेनेटाईज किये जाते है यहा तक हाथ धोने के लिये भी साबुन तक उपलब्ध नही है.
अदृष्य हुये विधायक
कोरोना काल में लोग तरह तरह के समस्याओ जुझ रहे है तो आये दिन बेहतर स्वास्थ व्यव्स्था नही मिलने से लोग काल के गाल में समा रहे है ऐसे में मतदाता अपने विधायक को खोज रहे है जो एक अरसे से अदृष्य है हालाकि कुछ दिनो पूर्व प्रेमनगर विधायक खेलसाय सिह ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 20 लाख रुपये की राशि कोरोना महामारी के लिये अस्पताल को आवश्यक संसाधन के लिये स्वीकृती दी है गौरतलब है कि प्रेमनगर विधायक खेल साय सिह है जिनके दामाद आर एस सिह है जिनके उपर जिले की स्वास्थ व्यव्स्थाओ की जिम्मेदारी है.
कोई जवाब नही
जिला अस्पातल की इन सब अवस्थाओ के संबंध मे जब जिला कलेक्टर से फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होने फोन उठाये नही और जब इन सवालो को उनके वाटसआप पर भेजा गया तो उसका भी कोई जवाब नही मिला जिससे प्रशासन लगता है कि इन सवालो का उनके पास कोई जवाब नही है.

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