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: जिले में गांजा का फलता-फूलता अवैध कारोबार....आबकारी विभाग बना मूकदर्शक....शराब पर कार्यवाही पर गांजा के मामले में विभाग के हाथ खाली...

Admin

Thu, Jun 4, 2020

राजेश सोनी
सूरजपुर-जिस ढ़ंग से सूरजपुर जिला मुख्यालय सहित ब्लाक व आसपास के ग्रामीण अंचलो में अवैध शराब व गांजा का कारोबार फल फूल रहा है। उस पर पुलिस तो गाहे-बगाहे नजर तिरछी कर लेती है लेकिन इन धंधो पर आबकारी विभाग की नजरे इनायत क्यों रहती है? यह तो विभाग ही जाने पर यह जरूर है कि जिले में इससे विभाग के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे है। हालांकि आबकारी विभाग खुद को संसाधन विहिन बताकर इससे पल्ला झाड़ने की कोशिश करता है। जिला मुख्यालय से लगे मानपुर, चंदरपुर, महुआपारा, नरेशपुर, उंचडीह भंवराही, गिरवरगंज, बसदेई, सिरसी, देवनगर, रामानुजनगर, करौंदामुड़ा आदि ऐसी जगहें है जो फिलहाल गांजे के कारोबार के लिए विख्यात है। नगर के ही मानपुर में तो बताया जाता है कि बकायदे दुकान खोलकर गांजा बेची जा रही है। यही नही शराब का भी यही हाल है गांव गांव में खुलेआम शराब बेची जा रही है। गांवो में लॉकडाउन के दौरान जब अंग्रेजी शराब का टोटा था तब महुआ शराब धड़ल्ले से उंचे दाम पर बेचे गए। शराब व गांजे के इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने आबकारी महकमे की स्थापना की है। लेकिन यह विभाग कभी इस पर कार्रवाई करता हो ऐसा प्रतीत नही होता। न तो बेचने वालो पर इस विभाग का खौफ और न ही इनका कोई मुखबीर तंत्र है। जबकि आबकारी महकमे में यहां जिला स्तर से लेकर मैदानी स्तर तक के कर्मचारियों की फौज है। यह अलग बात है कि इस अवैध कारोबार पर पुलिस अपनी सुविधा के अनुसार गाहे बगाहे कार्रवाई करती है और यह भी ढ़ोल पिटती है कि ऐसे कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में वह बेहद गंभीर है। लेकिन दावे के विपरित धंधे बाजो को कोई फर्क नही पड़ता और न ही कभी इनका नेटवर्क टूटता दिखाई पड़ता है। जिसका खामियाजा सरकार के राजस्व के साथ साथ उन युवा वर्गों पर पड़ता है जो इसकी चपेट में आते है। बहरहाल, जिला आबकारी अधिकारी रामकृष्ण मिश्र बताते है कि लॉकडाउन के दौरान आबकारी महकमा पूरी तरह सक्रिय रहा और इस दौरान 23 मार्च से 3 मई तक करीब 55 लीटर अवैध शराब के साथ 325 किग्रा लहान भी पकड़ा गया। वे यह भी बताते है कि पिछले वर्ष के मुकाबले उन्होंने इस वर्ष ज्यादा कार्रवाई की है। 2018-19 में जहां 238 प्रकरण बनाए गए थे वहीं 2019-20 में अबतक 269 प्रकरण बनाए जा चुके है। सभी अवैध महुआ शराब के प्रकरण है। लेकिन जब गांजे की बात आती है तो विभाग के हाथ पूरी तरह खाली है। इस सवाल के जवाब में विभाग के अधिकारी सवालकर्ता से ही पूछते है कि आप ही बताएं कहां बिक रहा है? जबकि पुलिस पकड़ती है तो खुद बखुद साबित हो जाता है कि गांजा धड़ल्ले से बिक रहा है और जिले में गांजे के कई केंद्र बिंदू भी है अब तो गांजे का पौधा भी घर-घर में लगाये जा रहे है । बावजूद इसके विभाग का अंजान बनना आश्चर्य से कम नही है। दूसरी ओर श्री मिश्र बताते है कि उनके पास संसाधन की भी कमी है। जिले के प्रतापपुर, ओड़गी जैसे ब्लाक में अबतक उपनिरीक्षक के पद खाली है। जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही नही विभाग में वाहन का भी अभाव रहा, हालही में उन्हे एक वाहन मिली है जिसे अधिकारी अपने निजी उपयोग करते है। उन्होंने कहा है कि शीघ्र ही विभाग मुहिम चलाकर गांजा और शराब के अवैध कारोबारियों पर अंकुश लगाने का कार्य करेगी।

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