: टारगेट के हिसाब होता है जांच….दिनों इंतजार करते है….संक्रमित खुद से खरीद रहे है दवा….नही मिलता है दवा समय पर….प्रबंधन खुद फैला रहा है संक्रमण....
Admin
Sat, Apr 17, 2021
राजेश सोनी
सूरजपुर- जिले में जैसे जैसे कोरोना बेकाबू होता जा रहा है वैसे वैसे जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं भी ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है. जिला प्रशासन बेकाबू कोरोनो को रोकने के लिये सख्ती पर सख्ती बरत रहा है यहां तक लट्ठ बजाने में भी पीछे नही रह रहा ताकि लोग किसी भी सूरत में घरों में रहे पर अस्पताल की व्यवस्थाएं तो ऐसी है कि आम तो आम कोरोना पीड़ित को भी अस्पताल बुला कर इधर उधर भटकाया जा रहा है जिससे संक्रमण का चैन टूटना तो दूर कड़ी के और जुड़ने की संभावना बढ़ जा रही है तो ऐसे में जिला प्रशासन के प्रयास तो फिर किसी काम के नही है जिले में कोरोना की दूसरी लहर इस कदर बेकाबू है कि प्रतिदिन न केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है बल्कि मौत के 75 तक आंकड़े जा पहुँचा.
किसी काम की नही सुविधाएं
अस्पताल में इंमरजेसी संसाधन उपलब्ध होने के बावजुद संचालित नही होने से यहा से मरीजो को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अम्बिकापुर रेफर कर दिया जा रहा. लापरवाही का आलम यह है कि कोविड टेस्ट के लिये लोग तीन चार दिनो से चक्कर काट रहे है उसके लिये भी जिसकी पहुच है उसका आसानी से टेस्ट किये जा रहे नही तो चक्कर काटते रहे और परेशान हो रहे है। कोरोना टेस्ट के लोग तीन चार दिनो से आ रहे और निराश होकर वापस जा रहे है तो वही आरटीपीसीआर जांच रिपोट जारी करने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है. टेस्ट कराने आये लोगो ने बताया यहा आरटीपीसीआर का सैंपल लेने में कतरा रहे है तो वही विभाग द्वारा जारी रिपोट में आरटीपीसीआर टेस्ट 12,13,14 अप्रैल को एक भी टेस्ट नही किया गया तो वही 15 अप्रैल को 269 सैंपल दिखाये गये और 16 अप्रैल को फिर से एक भी आरटीपीसीआर टेस्ट नही किया गया।
खुुद से करा रहे है इलाज
कोरोना संक्रमित मरीजो उपचार में किस कदर लापरवाही बरती जा रही यह कोरोना के मरीज खुद सामने आकर बता रहे है कोरोना संक्रमित पाये जाने पर होम आइसोलेशन में रहकर इलाज कराने वालो को बोला जाता है दवा भेज दिया जायेगा लेकिन भेजा नही जाता. फिर से फोन करने बोला जाता है यहा आकर दवा ले जाओ. संक्रमित दो चार दिन इंतजार के बाद खुद पहल करते हुये डाक्टर से संपर्क कर खुद के खर्चे से दवा खरीद रहे है तो वही कई मरीज ऐसे है जो बिना दवा खाये ठीक हो रहे है लापरवाही का दास्ता ऐसा है मरीज खुद फोन करके दवा मांगने पर भी विभाग उनके पास दवा तक नही पहुचा रहा है।
गलत सही रिपोट
कोरोना जांच कराने पहुचे स्थानिय निवासी के साथ कुछ ऐसा हुआ ना चुप रहते बन रहा ना कहते. अलबत्ता कोरोना जांच कराने के बाद उन्हे नगेटिव का रिपोट दिया गया इसके कुछ अंतराल बाद उन्हे कोरोना संक्रमित बताया गया. जिससे साफ जाहिर होता है कि स्वास्थ विभाग कोरोना वायरस जैसे संवेदनशील बीमारी के प्रति लापरवाही गंभीर नही है लोगो में नाराजगी देखी जा रही है बहरहाल कोरोना संक्रमित अब खुलकर स्वास्थ व्यव्स्थाओ की पोल खोल रहे है साथ ही स्वास्थ के जिम्मेदार अधिकारियो पर प्रश्नचिन्ह खडा कर रहे है.
अस्पताल प्रबंधक खुद फैला रहा संक्रमण
जिले में कोरोना की दुसरी लहर के संक्रमण से बचने के लिये जिला प्रशासन के पुलिस सख्त कार्यवाही पर जुटी हुई है आम लोगो को संक्रमण से जागरुक करते हुये कोरोना गाईड लाईन का पालन करने के साथ लाकडाउन में नही निकलने की अपील की जा रही है तो वही दुसरी तरह जिला अस्पताल प्रबंधक खुद संक्रमण फैलाने में लगी हुई है टेस्ट कराने आये व्यक्ति का रजिस्टृेशन होने के बाद सैंपल के लिये भेजा जाता है टेस्टिंग स्थल से सैपल लेने के बाद टेस्ट रिपोट मौखिक बताये जाने के बाद रिपोट की पर्ची लेने के लिये मरीज को खुद अस्पताल जाकर पंजीयन काउन्टर से 10 रुपये का पर्ची कटाते है खुल्ले पैसे के अभाव में मरीज इधर उधर जाता है अस्पताल प्रबंधक कोरोना संक्रमण को लेकर कितना संजीदा यह सैंपल स्थल आसानी से देखा जा सकता है|
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