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: डिजिटल इंडिया के इस दौर में एक गांव.....बिजली दिन में तो रहती है पर जब रात नही... मोबाइल तो है लेकिन गांव में नेटवर्क नही.....?

Admin

Mon, Feb 22, 2021

राजेश सोनी
सूरजपुर- डिजिटल इंडिया के इस दौर में जिले का एक गांव ऐसा भी है जहाँ आज भी बिजली दिन में तो रहती है पर जब रात को जरूरत है तब गायब हो जाती है और मोबाइल तो जैसे आज भी आकाश कुसुम ही है। ऐसा नही कि किसी के पास मोबाइल है ही नही लेकिन गांव तक नेटवर्क ही नही है तो मोबाइल किस काम का…? बात ओड़गी ब्लॉक के ग्राम बेदमी की है। करीब 2 हजार की आबादी वाले बेदमी में प्राकृतिक ने नेमत बख्शी है।चारो ओर पहाड़ से घिरे इस गांव तक पहुँचने के लिए अब जैसे तैसे सड़क बन सकी है जिससे ब्लॉक मुख्यालय तक आना जाना आसान हुआ है। पर इस गांव में अब तक बिजली नही पहुँची है। बिजली के लिए सौर ऊर्जा प्लांट लगा है लेकिन रख रखाव के अभाव में वह भी अंतिम सांसे गिन रही है। ग्रामीण बताते है कि दिन में इससे बिजली जलती है पर जब रात में जरूरत है तब बन्द हो रहती है।जिससे अंधेरे में गुजारना पड़ता है।
मोबाइल मतलब आकाश कुसुम
इस गांव के लिये डिजिटल इंडिया का कोई मतलब नही है। मोबाइल नेटवर्क के लिए दो वर्ष पूर्व जियो का टावर तो लगा दिया गया है पर उस टावर तक कनेक्शन के लिए वन विभाग ने अपनी जमीन से तार नही ले जाने दिया गया जिसके फलस्वरूप टॉवर केवल शोपीस बन रह गया है। अब हालात यह है कि ओड़गी या रामकोला के टावरों से गांव के कुछ चिन्हांकित जगहों पर नेटवर्क मिलता है जहाँ लोग जा कर मोबाइल से बात करते है। यानि वे जरूरत के अनुसार किसी से बात कर पाते है जबकि दूसरी ओर से कोई चाहे तो सम्भव नही है।इसके लिए कई बार नेता व अधिकारियों से आग्रह किया गया पर कहा कोई सुनने वाला है।
पानी से खुशहाली
ओड़गी ब्लॉक मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बेदमी में प्राकृतिक ने खूब नेमत बरसी है। यहां पहाड़ के ऊपर निकले पानी के स्रोतों से 12 महीने लोगो को लबालब पानी मिलता है यहां तक कि हर घर के दरवाजे तक पानी पर्याप्त मात्रा में पहुँचता है। ग्रामीण बताते है कि पहाड़ से पानी जैसे ही नीचे आता है वैसे ही ग्रामीण अलग अलग मोहल्लों के नाली बना रखा है और नियमित ग्रामीण पानी की धार मोड़ने व्यवस्था बना रखे है जिससे हर घर तक पानी पहुँचता है। जिससे वे खेती के साथ अन्य उपयोग करते है।ग्रामीण चाहते है कि प्रशासन से कोई मुक्कमल इंतजाम हो जाता तो और बेहतर लाभ लिया जा सकता । जिले के पहले कलेक्टर भारती दासन ने इसके लिए आशवस्त किया था पर उनके तबादले के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इस गाँव मे प्रकृति ने अनुपम छटा बिखेरी है और ऐतिहासिक महत्व के भी कई दर्शनीय स्थल है जो गुमनामी में है। रियासतकाल से इस गांव की चर्चा होती रही है पर दर्शनीय व ऐतिहासिक महत्व के जगहों को सहेजने की दिशा में कोई पहल नही हुई है। जिससे पूरा गांव उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
विस्थापन का भय
तेमोर पिंगला अभ्यारण्य से लगा यह गांव है। बताते है कि नए नियमो के अनुसार अभ्यारण से लगे 15 किमी के गांव खाली करने होंगे। हालांकि अभी तक कोई नोटिस आदि नही मिले है पर चर्चाओं में बात सामने आने को लेकर गांव के लोग विस्थापन को लेकर चिंतित है।वर्षो से रह रहे ग्रामीण आखिर जाएंगे कहा…?

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