: नाबालिको ले जाते बस को ग्रामीणों ने पकड़ा.....तमिलनाडु ले जाया जा रहा था.....22 लोग एक सप्ताह पहले ही जा चुके है बड़े शहर.....
Admin
Fri, Nov 6, 2020
सूरजपुर-कोरोना अभी खत्म नही हुआ है और जिले के ग्रामीण अंचल में एक बार फिर मानव तस्कर सक्रिय हो गए है। बुधवार रात जिले के बिहारपुर अंचल में तमिलनाडु की एक बस ग्रामीणों ने पकड़ कर पुलिस के हवाले किया है जिसमे करीब 52 मजदूर बैठे हुए थे,जिसमे 31 बच्चे भी शामिल है। इन बच्चों को जिला मुख्यालय भेजा गया है जहाँ CWC द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि बुधवार की रात बिहारपुर अंचल बिशालपुर में तमिलनाडु प्रान्त की एक बस लोगो ने देखा और रोक कर चालक से पूछताछ की तो मुक्कमल जबाब न मिलने पर संदेह हुआ और इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर बस को अपने कब्जे में ले लिया । हालांकि पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नही की है। पुलिस के अनुसार बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष भेजा गया है जहाँ से आगे की कार्रवाई की जा रही है । इधर जिला बाल सरंक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बताया कि बिशालपुर में बच्चों के होने की जानकारी मिलने पर टीम वहां भेजा गया था। सभी 31 बच्चों को सूरजपुर लाया जा रहा है जहाँ से उन्हें बाल सरंक्षण गृह भेजा गया है और आगे की कार्यवाही की जा रही है|जबकि कोल्हुआ गाँव के ईंमली पारा के 22 मजदुर कामकाज रोजगार के आभाव में बड़े शहर जा इ चुके है|
नही किया जा रहा था नियमो का पालन.........
बताया गया है कि 52 मजदूरों को बस क्रमांक टी एन 34 बी 4496 से तमिलनाडु की एक धागा कंपनी में काम करने को ले जाया जा रहा था। जिसमें करीब 31 बच्चे 15 से 17 साल के नाबालिक है । उक्त सभी लोग बलरामपुर, सिंगरौली.यूपी व बिहारपुर अंचल के बताए गए है। जिस बस से उन्हें ले जाया जा रहा था उसमें कोरोना नियमो का कोई पालन नही किया जा रहा था। न मास्क लगे थे और न कोई अन्य एहतियात बरती जा रही थी।
बेरियर नाको पर सवाल...
खबर है कि उक्त बस मध्यप्रदेश से होकर आ रही थी जहाँ सीमा पर नाका लगा हुआ है। इन नाको पर आम आदमी के गुजरने में पुलिस के पूछताछ से पसीने छूट जा रहे है पर इतनी बड़ी बस बिना रोक टोक के पार हो गई कैसे..? क्या कोई चूक हुई या नाके पर मौजूद पुलिस कर्मियों की जेब गर्म हुई यह जांच का विषय हो सकता है।रोजगार का अभाव.... कोरोना काल मे बड़े पैमाने पर इन इलाकों से मजदूर घर लौटे है । जो रोजगार के अभाव में बेरोजगारी की मार झेल रहे है। सरकार व प्रशासन भले कुछ भी दावे कर ले पर हकीकत यह है कि गांव में रोजगार की कोई व्यवस्था नही है जिससे लोग पलायन करने को विवश है। हालांकि कुछ लोग शौकिया तौर पर भी बाहर काम करने जाना चाहते है। बताया जाता है कि बलरामपुर ,सूरजपुर जिले के इन इलाकों में अब ऐसे लोग फिर सक्रिय हो गए है जो मजदूरों को बाहर लेकर जाना चाहते है।
दो से अधिक लोगो की जा चुकी है जान.....
कोरोना काल मे जहां से बाहर से लौटा एक युवक कोरोना संक्रमित होकर यहां पहुँचा था जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी । यह युवक बिहारपुर का था इसी तरह आंध्र प्रदेश में यही के एक युवक की मौत हो गई थी तब जैसे तैसे यहां शव लाया गया था।
केंद्रीय मंत्री ने सरकार व पुलिस पर खड़े किए सवाल.....
इधर केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने 52 मजदूरों को तमिलनाडु ले जाये जाने की जानकारी पर सरकार पर सवाल खड़े किए है । रेणुका सिंह ने कहा है कि प्रदेश सरकार आदिवासी गरीबो को रोजगार देने में असफल है जिससे सूरजपुर, बलरामपुर जिले से लोग पलायन को विवश है। उन्होंने पुलिस के नाको पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है इन नाको में जब 24 घण्टे पुलिस तैनात रहती है तो यह बस कैसे पार हो गई ,मजदूरों के इस पलायन में पुलिस की मिलीभगत तो नही है..? इसकी जांच होनी चाहिए।
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