: न्याय और रोजगार की आश में रानु बेक...जुल्म उत्पीडन के शिकार हुये आदिवासियों को न्याय तक नसीब नही...बडे धुमधाम से मना आदिवासी दिवस,लेकिन उनके ही समाज की पिडिता की खबर लेने वाला कोई नही...
Admin
Tue, Aug 10, 2021
राजेश सोनी
सूरजपुर. 9 अगस्त को राज्य में बडे धुमधाम से आदिवासी दिवस मनाया गया इस दौरान सभी जिले में आदिवासी दिवस पर बडे उत्साह से कई कार्यक्रम हुये जिसमें बडे बडे आदिवासी नेता मंत्री सहित अधिकारी सम्मलित हुये.बडे शानो शौकत से खुशिया मनाये गये. लेकिन आज भी आदिवासी समाज के लोग न्याय के लिये तरस रहे दर दर की ठोकर खा रहे है उत्पीडन का शिकार परिवार एक एक पैसा का मोहताज हो गया. जिसका जीता जागता उदाहरण अधिना सलका निवासी रानु बेक का है पुलिस की हिरासत में मौत का सबसे चर्चित मामला सूरजपुर जिले के अधिना निवासी पंकज बेक का रहा. पंकज को चोरी के आरोप में 21 जुलाई 2019 को सरगुजा जिले के कोतवाली थाने में बुलाया गया था इसके दूसरे दिन उसका शव अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल की खिड़की से लटका हुआ मिला था. मृतक की पत्नी रानु बेक ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रदेश सहित केन्द्र की सभी संवैधानिक संस्थाओं से की थी. जिस मामले को लेकर भाजपा ने मुददा भी बनाया था जिसकी गुंज विधानसभा तक उठी थी इसके बाद सत्ता पक्ष के और विपक्ष के सभी बडे नेता मृतक पंकज बेक की पत्नी रानु बेक से मिलकर इतनी ज्यादा सात्वना दे दी थी कि रानु बेक को लगा था कि उसके पति के हत्यारे जेल की सलाखो के पीछे होगे व उसका परिवार का लालन पालन आराम से होगा. प्रदेश के केबिनेट मंत्री की रिश्ते में रानु बेक भतीजी लगती है और भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने भी उन्हें गोद लेने और उनके बच्चे सहित उनका पूरा जिम्मेदारी उठाने का वादा किया था. लेकिन आज इनकी पूछ परख लेने वाला कोई नहीं है.दो वर्षो के बाद भी इंसाफ न्याय की आश लिये रानु बेक दर दर भटक रही है अपना और दो बच्चो का पेट भरने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है.

वादा तेरा वादा
कहते है नेता और मंत्री के वादो पर एतबार नही करना चाहिये रानु बेक के साथ ऐसा ही हुआ. क्षेत्र के एक मात्र भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री ने तो उन्हे गोद लेकर न्याय रोजगार का भरोसा दिलाया गया था लेकिन ना तो रोजगार मिला ना ही न्याय, यहा तक की उसके पति के मौत हुये दो वर्ष हो गये लेकिन अभी तक उसका विधवा पेशन का कार्ड तक नही बना है.सात्वना के रुप में केन्द्रीय राज्य मंत्री की सिफारिश पर 6 माह कन्या आश्रम में खाना बनाने का काम अवश्य मिला था उसके बाद स्थिति जस की तस बनी हुई है.
अधिना सलका के ग्रामीणो ने नेताओ मंत्रियो का कथनी और करनी को करीब से देखा और पहचाना भी है कभी रानु बेक के पति की मौत पर राजनीति चमकाने वाले नेता के बारे में ग्रामीणो का विचार बहुत अच्छे नही है स्थानीय लोग भी यह मान रहे हैं की रानू बेक के साथ वादा खिलाफी हुई है गांव के लोग अब भी रानु बेक के साथ हैं और उनके लिए सरकारी नौकरी सहित उसके पति की हत्या करने वाले की सजा की मांग कर रहे हैं
एक तरफ पति की मौत का दर्द, दूसरी तरफ बच्चों को पालने की जिम्मेदारी, ऊपर से नेताओं की वादाखिलाफी और अपनो की बेरुखी.इतने चुनौतियो की बावजुद यह महिला अपने पति को न्याय दिलाने के लिये जददोजेहद कर रही है.
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