ब्रेकिंग

ब्रांडेड शोरूमों के भ्रामक प्रचार के खिलाफ सराफा व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन, 'समान नीति' और सख्त नियमों की मांग

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 5 सितंबर तक, अब तक 1944 मरीजों की जांच

साहब की दबंगी, सफाईकर्मियों पर बरसाए 'प्रशासनिक' थप्पड़

बोल बम' के जयघोष से गुंजायमान होगी सूरजपुर नगरी,16अगस्त को ऐतिहासिक जमड़ी धाम के लिए प्रस्थान करेगी भव्य कांवड़ पदयात्रा

सूरजपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर दिखा भव्य नजारा, पर चरमराई यातायात व्यवस्था और DJ के शोर से लोग रहे परेशान

सूचना

: पशुओं की एल.एस.डी. बीमारी का जाने उपचार, कारण व बचाव...

Admin

Wed, Jul 26, 2023

सूरजपुर. ढेलेदार त्वचा रोग ( Lumpy Skin Disease LSD) गौवंशीय में होने वाला विषाणुजनित संक्रामक रोग है। जो कि  Pox Family का वायरस है, जिससे पशुओं में पॉक्स (माता) रोग होता है। वातावरण में गर्मी एवं नमी के बढ़ने के कारण तेजी से फैलता है। पशुओं को यह बीमारी एल.एस.डी. संक्रमित पशुओं के सम्पर्क में आने से व वाहक मच्छर, टिक्स (चमोकन) से होता है। एल.एस.डी. की वजह से दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन एवं अन्य पशुओं की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
लक्षणः एक या दो दिन तेज बुखार, शरीर एवं पांव में सुजन, शरीर में गठान या चकते गठान का झड़कर गिरना एवं घाव का निर्माण।
बचावः संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें, पशुओं एवं पशुघर में टिक्स मारक दवा का उपयोग करें।
उपचारः एल.एस.डी. विषाणु जनित रोग है, तथा टीका एवं रोग विशेष औषधी न होने के कारण पशु चिकित्सक के परामर्श से लक्षणात्मक उपचार किया जा सकता है। बुखार की स्थिति में पैरासिटामोल, सूजन एवं चर्म रोग की स्थिति में एन्टी हिस्टामिन एवं एंटी इंफ्लेमेटरी दवाइयां तथा द्वितीयक जीवाणु संक्रमण को रोकने हेतु 3-5 दिनों तक एंटीबायोटिक दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है।
अपीलः इस रोग में पशु मृत्यु दर नगण्य है। पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों से अपील किया जाता है कि एल.एस.डी. से भयभीत न होकर उपरोक्त तरीकों से पशुओं का बचाव व उपचार करावें। विशेष परिस्थितियों में निकटतम पशु चिकित्सक से तत्काल संपर्क करें।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें