: लालबत्ती नही मिलने से संगठन से जुड़े कांग्रेसी हताश...भाजपा में जिलाध्यक्ष को लेकर कवायद तेज... कांग्रेसियों को है अब दूसरी सूची का इंतजार.... हताशा के दौर से गुजर रही भाजपा में किसे सौंपे कमान इसे लेकर की जा रही माथापच्ची....
Admin
Sat, Jul 18, 2020
सूरजपुर- जिले की सियासत में इन दिनो पदो को लेकर हलचल तेज है। करीब 15 वर्ष तक सत्तानशी रही भाजपा पिछले कुछ समय से लूप लाईन में जैसे है तो कांग्रेस भी कमोवेश सत्ता व संगठन के बीच चल रही रस्साकस्सी के बीच आम जनता के मुद्दों से भटकती दिखाई पड़ रही है। बहरहाल इस बीच कांग्रेस में जहां लालबत्ती को लेकर हलचल थी तो वहीं भाजपा में नए जिलाध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर कवायद तेज हो गई है। कांग्रेस में लालबत्ती के लिए सूची जारी कर दी गई है। सूरजपुर जिले से इसके लिए पूर्व जिलाध्यक्ष विन्धेश्वरशरण सिंहदेव बड़े दावेदार के रूप में उभर कर सामने आए थे। स्थिति यह थी कि उन्हे इस बत्ती तक पहुंचाने के लिए संगठन व सरकार से जुड़े तमाम लोगों ने मुख्यमंत्री को खत लिखा था और इस बहाने कांग्रेस में एक जुटता का प्रदर्शन भी किया गया था। बावजूद इसके पहली सूची में कांग्रेस आलाकमान ने जिले में संगठन से जुड़े लोगों को तव्वजो नही दी है। जिससे संगठन से जुड़े लोगों में खासा निराशा है। हलाकि यह दावा किया जा रहा है कि दूसरी सूची भी शीघ्र ही जारी होगी जिसमें जिले को महत्व मिल सकता है। अलबत्ता पहली सूची में भटगांव विधायक पारसनाथ राजवाडे को संसदीय सचिव बनाया गया है। लिहाजा सूरजपुर जिले में पहले से दो केबिनेट मंत्री के रहते और एक संसदीय सचिव बनाए जाने से जिले के हिसाब से महत्व काफी मिला है। परन्तु संगठन से जुड़े लोग इससे संतुष्ट नही है। कांग्रेस में संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि संगठन से जुडे़ लोगों को भी महत्व मिलना चाहिए ताकि वे और उर्जावान होकर पार्टी के लिए काम कर सकें। फिलहाल वे निराशा की मुद्रा में है और उन्हे पार्टी के आला नेता यह कह कर तस्सली दे रहें है कि दूसरी सूची में संगठन को अहमियत दी जाएगी। दूसरी ओर कांग्रेस में यह पहला अवसर है जब जिले की कमान किसी महिला के हाथो में सौंपी गई है। परन्तु यहां भी खींचतान का नजारा है। शायद यही वजह है कि जिलाध्यक्ष के पद संभालने के महिनो बाद भी आज तक जिला कार्यकारिणी विस्तार नही किया जा सका है। कार्यकर्ता इसका भी इंतजार करते थकते नजर आ रहें है। इधर भारतीय जनता पार्टी जो सत्ता खोने के बाद हताशा के दौर से गुजर रही है उसमें भी जिलाध्यक्ष को लेकर कुछ हलचलें बढ़ी है। बताया जा रहा है कि यूं तो भाजपा जिलाध्यक्ष पर नियुक्ति नगरीय निकाय चुनाव के पूर्व होना था। परन्तु उस समय नगरीय निकाय के चुनावी नफा नुकसान के लिहाज से टाल दिया गया था। तब से अब तक इस पद के लिए जोड़ तोड़ की सियासत चल रही है। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी में शीघ्र ही इस पद पर किसी नए चेहरे की ताजपोशी की जा सकती है। इस पद के लिए जिन दावेदारों के नाम सामने आएं है उनमें बाबूलाल अग्रवाल, बनारसीलाल जायसवाल तथा मुरलीमनोहर सोनी, शशिकांत गर्ग जैसे नाम प्रमुख है। भाजपा भी चाहती है कि जिले की बागडोर ऐसे व्यक्ति के हाथो हो जो सत्ता खोने के बाद हताश कार्यकर्ताओं में न केवल जान फूंक सके बल्कि जिले में विपक्ष की भूमिका भी दमदारी से अदा कर सके। ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा कि इस पद पर किसकी ताजपोशी की जाती है? पर इस पद के लिए भाजपा के विभिन्न गुटो के नेता अपने अपने स्तर पर जबरजस्त लाबिंग कर रहें है। भाजपा में जहां केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह वर्तमान में एक शख्सियत है और वे अपना वर्चस्व कायम रखना चाहती होंगी तो वहीं पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा भी भले आज लूप लाईन में हो पर संगठन में अपना दबदबा बरकरार रखने की कोशिश में लगे हुए है। इधर वरिष्ठ व संघ से जुड़े खांटी नेता आरके शुक्ला व भीमसेन अग्रवाल भी जिलाध्यक्ष के पद पर ऐसे चेहरे को बैठाना चाहतें है जो इनके लिए वफादार साबित हो। इन सियासी हलचलो के बीच भाजपा में जहां नए जिलाध्यक्ष का बेसब्री से इंतजार है तो वहीं कांगे्स में नईं जिला कार्यकारिणी के विस्तार व लालबत्ती को लेकर संगठन से जुड़े कांग्रेसी नेता खुद को वार्मअप किए हुए है। देखना यह है कि सियासी दलो का यह इंतजार कब खत्म होता है?
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