: विश्व बाल दिवस विशेष…..कैसे सुधरेगा जिले में बच्चो के हालात….कैसे रुकेगी बाल तस्करी और अपराध...? जब सरकारी मशीनरी भविष्य बचाने के नाम पर कर रही खानापूर्ति........
Admin
Fri, Nov 20, 2020
राजेश सोनी
सूरजपुर--- बधाई…आज विश्व बाल दिवस है परंतु सूरजपुर जिले में बच्चो पर नजर रखने के लिए तमाम मशीनरी कार्यरत है बावजुद इसके सवाल यह है कि ओडगी ब्लाक के दुरस्थ अंचल के बच्चे जिनका फिलहाल शिक्षा स्वास्थ्य का बुनियादी हक और अधिकार है वे बच्चे महानगरो में रोजगार की तलाश में जाने को विवश है महानगरो में जाने का एक तो क्षेत्र व परिवार की मजबुरी है तो अभी हाल की घटनाओ पर नजर डाले तो बिहारपुर चांदनी क्षेत्र से ही नाबलिक किशोर बच्चो का महानगरों मे रोजी रोटी तलाश जाने का सिलसिला की शुरुआत हो गई है बिहारपुर व उसके आसपास के 22 पंचायतो का आलम यह है कि रोजगार के मुक्कमल साधन मुहैया नही है जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नही होने से जिन बच्चो की रुचि शिक्षा मे होनी चाहिये थी उन्हे रोजगार के लिये सोचना पड रहा है यही नही स्कुलो का आलम यह है कि साल में जब दो बार 15 अगस्त और 26 जनवरी को स्कुल खुले तो जाहिर है कि ऐसे में बच्चो के शिक्षा के प्रति कितनी जागृति होगी बहरहाल लाक डाउन के बाद एक बार फिर इन दुरस्थ अंचलो में मानव तस्कर सक्रिय हो गये है। जिसका सबुत पिछले दिनों तमिलनाडु की पकडी गई एक बस को माना जा सकता है जिसमें से 53 ऐसे लोग सामने आये थे जो मजदुरी के लिये बाहर जा रहे थे इसमें करीब 31 नाबालिक बच्चे भी थे यह अलग बात है कि इसमे से कोई भी सूरजपुर जिले से नही था परंतु जिले से लगे बलरामपुर व मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के लोग शामिल थे।
ग्रामीणो की सजगता से हुई कार्रवाई……..
तमिलनाडु के धागा फैक्टृी मे जा रही उक्त बस को विशालपुर के ग्रामीणो की सजगता से पकड लिया गया. जिस पर पहले तो कार्यवाही मे आना कानी की जा रही थी लेकिन जब रायपुर लेबल के अधिकारी की फटकार पडी तो जिला प्रशासन को मामले में गुनाह नजर आया और आनन-फानन में फिर जहा बच्चो को पहले बाल गृह बाद में परिवार के सपुर्द किया गया. वही मामले में बाल सरंक्षण ईकाई की पहल पर 6 लोगो पर अपराध दर्ज कर 3 लोगो को गिरफ्तार किया गया है जबकि 3 तस्करों की तलाश की जा रही है। उक्त मामले में जानकार बताते है कि सूरजपुर जिले के लोग भी बस में सवार थे पर जान बचाने के लिये सूरजपुर जिले के लोगो को विलोपित किया गया ताकि प्रशासन की किरकिरी होने से बच सके।
पुलिस की भूमिका पर सवाल……..
वैसे तो कहने के लिये पुलिस ने कई तरह के अभियान चला रखी है पर मामला नाबलिक के गुमशुदी,तस्करी,श्रम कराने के मामले मे पुलिस की कोई ठोस कार्यवाही अबतक नही देखी गई ना ही पुलिस इस मामलो की रोकथाम के लिये कोई प्रयास करती नजर आई। तो वही मानव तस्करी से जुडे दलालो ने जिले के दुरस्थ क्षेत्रे के नाबलिको लोक लुभावन लालच देकर परिजनो को बिना बताये बडे शहर भेजे देते जहा पर उनका शोषण किया जाता रहा, बंधक बने नाबालिको को अपने परिजनो से मोबाईल पर बात तक नही करने देते है इसका खुलासा तब हुआ जब हैदराबाद से एक नाबालिक श्रमिक का शव 15 जनवरी को चोरी छुपे ठेकेदार ने गृहग्राम भेजा गया था तब पुरे मामले की सच्चाई सामने आई जब बाल सरंक्षण की टीम ने वहा जाकर पुरे मामले की वस्तु स्थिति को समझकर इस मामले के तीन दोषियो के खिलाफ बिहारपुर चांदनी थाने मे अपराध दर्ज कराया गया था। इस पुरे जांच पडताल मे 22 ग्राम पंचायत के 100 से ज्यादा नाबालिक बडे शहरो मे बधुआ मजदुरो की तरह काम कर रहे थे।
आर्थिक बदहाली से मजबुर है ग्रामीण…..
बाल अपराध के मामले में कई अलग-अलग कारण हैं जो बाल तस्करी को जन्म देते हैं, प्राथमिक कारण गरीबी, कमजोर कानून प्रवर्तन और अच्छी गुणवत्ता वाली सार्वजनिक शिक्षा की कमी है.. बच्चों का लाभ उठाने वाले तस्कर आसपास या पडोसी गांव के होते है जो बच्चे को व्यक्तिगत रूप से भी परिचित होते है।
जरुरत है सुक्ष्म निगरानी की…….
प्रभावित गाँवों में सूक्ष्म स्तर की निगरानी के लिए सिस्टम बनाने की जरूरत है, ताकि लॉकडाउन से प्रभावित परिवारों के बच्चों को बाल श्रम के रूप में काम करने से रोका जा सके,पंचायतें, अन्य ग्रामीण स्तर के अधिकारी साथ ही ब्लॉक के अधिकारियों को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए कि बच्चे काम न करें और स्कूलों में बरकरार रहें बाल तस्करी अपराध श्रम कानूनों की कमजोर पड़ने पर तुरंत बचाव करना चाहिए। प्रभावित गांवो से विश्वसनीय जानकारी मिली है कि लॉकडाउन खुलने के बाद बाल तस्करी के मामले बहुत ज्याद होने की संभावना जताई जा रही है। तस्कर सक्रिय हो गए हैं, संभावित पीड़ितों और परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और कई परिवारों को एडवांस पेमेंट के साथ उनको लाने के लिये बसे भी भेजे जा रहे है। गौरतलब है कि लाखों प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों के लिए लॉकडाउन आफत बनकर टूटा. हजारों पैदल ही अपने गांवों को लौटे. हालांकि ये हृदयविदारक सच्चाई है कि वहां भी गरीबी और भूख उनका इंतजार कर रही थी, क्योंकि गांव में काम ना मिलने की वजह से ही तो वो शहरों की तरफ गए थे. कईयों को भारी ब्याज दरों पर कर्ज लेना पडा। कोरोना से खड़े हुए आर्थिक संकट ने असुरक्षा और गरीबी बढ़ाई है। बाल तस्कर, संघर्ष कर रहे परिवारों की स्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान परिवारों के बच्चों को भी शिकार बनाये जायेगे।

बाल विवाह बाल श्रम व नशे की प्रवृति भी बच्चो कर रही बर्बाद………
जिले में पुलिस के साथ साथ महिला बाल विकास,चाईल्ड लाईन, श्रम विभाग आदि जैसी सरकारी संस्थाये बच्चो को सरंक्षण व जागृत करने के लिये समय समय पर लाखो रुपये खर्च कर अभियान चलाया जाता है लेकिन यह अभियान कितना हकीकत कितना फसाना है यह इन आकडो से समझा जा सकता है वर्ष 2018-119 में बाल विवाह, चोरी,बाल श्रम, बाल सरंक्षण विभाग के अनुसार वर्ष 2019 में 199 व 2020 मे अबतक 181 बाल अपराध के मामले दर्ज किये गये है। इसी तरह सखी वन स्टाफ सेंटर मे 2017 से अब तक 182 प्रकरण दर्ज किये गये है जो बच्चो से जुडे मामले है यहा कई बच्चो को आश्रय भी दिया गया है। बच्चे देश का भविष्य हैं, इसलिए उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है. इस स्थिति में, दोनों को अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभानी होगी और बच्चों के वर्तमान और भविष्य की रक्षा करनी होगी.. लॉकडाउन ने वित्तीय संकट और गरीबी को जन्म दिया है कई परिवारों को हताशा में डाल रहा है उनके अपने बच्चों को तस्करी के लिए धकेलने के लिए अतिसंवेदनशील बना रहा है. वर्तमान स्थिति पंचायती राज संस्थाओं में पंचायतों को गांवों के भीतर और बाहर बच्चों की निगरानी के लिए एक प्रवास रजिस्टर बनाए रखने के लिए अनिवार्य किया गया है लेकिन ग्रांम पचायत प्रतिनिधि या सचिव इस पर ध्यान नही देते ना ही माइग्रेशन रजिस्टर को नियमित रूप से ब्लॉक अधिकारियों द्वारा जांचा और सत्यापित किया जाता है। एमसीसीआर फेलाशिप के अंतर्गत यह स्टोरी की गई है।
क्या कहते अधिकारी………
बाल सरंक्षण की दिशा में जिले में काफी प्रयास किये जा रहे है जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आये है थोडी जागृति की कमी के कारण बाल विवाह के मामले जरुर है जिसमें सभी विभागो को समन्यव बना कर काम करने की जरुरत है। जहा तक सवाल तस्करी का है तो बहुतेरे मामले से स्वेछा के सामने आये है पर यह तय है कि दुरस्थ अंचल में रोजगार और शिक्षा की कमी है इसे दुर कर लिया जाये तो यह मामले भी सामने नही आयेगे-मनोज जायसवाल जिला बाल सरंक्षण अधिकारी सूरजपुर
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