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कहर : ठाडपाथर में बड़ा हादसा – आकाशीय बिजली चपेट छात्र की मौत, दो साथी घायल..

Pappu Jayswal

Fri, Sep 19, 2025

स्कूल से लौट रहे थे तीनों छात्र, बारिश से बचने पेड़ के नीचे खड़े हुए – बिजली गिरते ही मातम में बदला गांव

चांदनी बिहारपुर. जिले के ओडगी विकासखण्ड के चांदनी बिहारपुर अंचल के ठाडपाथर क्षेत्र में आज शुक्रवार की शाम लगभग 4 बजे दर्दनाक हादसा हो गया।स्कूल से पढ़ाई कर लौट रहे तीन छात्रों पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस घटना में रंजीत सिंह पिता जगनाथ उम्र 15 वर्ष, निवासी विशालपुर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।तीनों छात्र कक्षा नवमी में पढ़ते थे। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी के बाद रंजीत सिंह, सुनील कुमार पिता हरि शरण बैस और अनूप कुमार पिता रामदेव बैस घर लौट रहे थे।ठाडपाथर–रेडीपहाड़ी मार्ग पर अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए तीनों छात्र सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए।इसी दौरान आकाशीय बिजली उस पेड़ पर गिरी और तीनों छात्र उसकी चपेट में आ गए।रंजीत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुनील और अनूप गंभीर रूप से झुलस गए।घायल बच्चों का इलाज जारी घटना की सूचना पर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और।दोनों घायलों को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिहारपुर लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत चिंताजनक बताई है और बेहतर इलाज के लिए उन्हें रेफर करने की तैयारी की जा रहा है

गांव में मातम और दहशत

मासूम छात्र की मौत की खबर सुनते ही विशालपुर गांव में कोहराम मच गया। मृतक रंजीत के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।गांव के बुजुर्गों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कोई सुरक्षा इंतज़ाम नहीं कर पाया।

लोगों ने बताया कि इस इलाके में दर्जनों बार बिजली गिरने से इंसानों और मवेशियों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप – “न जागरूकता, न सुरक्षा”ग्रामीणों ने कहा कि –गांवों में लाइटनिंग अरेस्टर तक नहीं लगाए गए।प्रशासन की लापरवाही के कारण हर साल इस तरह मासूमों की जान जाती है

प्रशासन पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल इस क्षेत्र में लाइटनिंग अरेस्टर लगाए जाएं, जागरूकता अभियान चलाए जाएं और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए।लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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