"दोपहर में हुई मौत, शाम तक क्या सो रहा था प्रशासन? : कुबेरपुर कांड पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का रौद्र रूप, पुलिस अफसरों को लगाई फटकार
Subhas Gupta
Tue, Oct 20, 2026
सूरजपुर। खाकी की 'अंधी निष्ठा' का ऐसा शर्मनाक खेल शायद ही कहीं देखने को मिले, जहां सड़क पर एक महिला का शव कुचल दिया जाता है, लेकिन पुलिस का कलेजा माफिया के अवैध क्रेशर में लगी आग देखकर कांप उठता है। बिहारपुर चांदनी के कुबेरपुर कांड ने सूरजपुर पुलिस-प्रशासन के रसूखदारों के आगे नतमस्तक होने के रवैये को बेनकाब कर दिया है। जब खुद प्रदेश की कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पीड़ित परिवार के आंसुओं पर मरहम लगाने कुबेरपुर पहुँचीं, तो पुलिस का यह पक्षपाती खेल देखकर उनका धैर्य जवाब दे गया। मंत्री ने पुलिस और ग्रामीणों को आमने-सामने खड़ा कर लापरवाह अफसरों की क्लास लगा दी।
"अवैध धंधा नहीं दिखा, लाठियां सिर्फ जनता पर?"
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अफसरों से तीखे लहजे में सवाल किया—"दोपहर 12 बजे एक महिला को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया, तब शाम 7 बजे तक प्रशासन कौन सा कुंभकर्णी आराम फरमा रहा था? क्या अफसर क्रेशर में आग लगने का इंतज़ार कर रहे थे ताकि अपनी नाकामी छुपाकर जनता पर एफआईआर की झड़ी लगा सकें?"
मंत्री ने पुलिस की नीयत पर सीधा प्रहार करते हुए पूछा कि खून से सने गिट्टी लोड ट्रैक्टर और उसके अवैध क्रेशर संचालक पर हाथ डालने में पुलिस के हाथ क्यों कांप गए? आगजनी में निर्दोष ग्रामीणों को खोज-खोजकर जेल भेजने में जितनी तेजी दिखाई गई, क्या उतनी तेजी उस अवैध साम्राज्य की जांच में दिखाई गई जिसकी वजह से यह मौत हुई?
खाकी का अजब 'न्याय': खूनी खुला घूमे, रोते ग्रामीणों पर मुकदमे
17 अक्टूबर को महिला की कुचलकर हुई मौत के बाद जब सिस्टम नहीं जागा, तब फूटे जनाक्रोश को दबाने के लिए पुलिस ने वही किया जो वह हमेशा करती है कमजोरों पर गंभीर धाराओं की लाठी भांजना। 26 नामजद सहित दर्जनों लोगों पर संगीन अपराध दर्ज कर छह ग्रामीणों को आनन-फानन में जेल भेज दिया गया। कमाल की बात यह है कि पुलिस ने अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए भाजपा, आरएसएस और कांग्रेस तक के स्थानीय नेताओं को मुकदमों में लपेट दिया, ताकि इसे राजनीतिक रंग देकर असली गुनाहगार को बचाया जा सके।
अफसरों को हटाने के निर्देश, पुलिस को दो टूक हिदायत
मंत्री के तेवर देख मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने उच्चाधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि घटना के वक्त तमाशबीन बने रहने वाले तहसीलदार, एसडीओपी और थाना प्रभारी पर तत्काल कार्रवाई हो।
साथ ही उन्होंने पुलिस को कड़ी चेतावनी दी कि बिना पुख्ता सबूतों के सलाखों के पीछे धकेले गए ग्रामीणों को बिना शर्त रिहा किया जाए और कस्टडी में किसी के साथ मारपीट की हिमाकत न हो। मंत्री ने साफ कर दिया कि सूरजपुर में माफिया को संरक्षण देकर जनता को प्रताड़ित करने का खाकी का यह ढर्रा अब बिल्कुल नहीं चलेगा।
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