रिंग रोड पर फिर ‘थूक-पॉलिश’ : छलनी सड़क पर डामर की लीपापोती, सुगम सफर का दावा या बजट ठिकाने लगाने का खेल?
Subhas Gupta
Mon, Oct 19, 2026
सूरजपुर। शहर की बदहाल सड़कों के स्थाई कायाकल्प की उम्मीद लगाए बैठी जनता को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक बार फिर छलावा थमा दिया है। लंबे अरसे से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही रिंग रोड के पूर्ण पुनर्निर्माण की जगह विभाग ने उस पर ‘बीटी पैच रिपेयरिंग’ का झुनझुना बजाना शुरू कर दिया है। जानलेवा गड्ढों और उड़ती धूल से त्रस्त जनता का सीधा आरोप है कि जर्जर सड़क पर डामर की पतली चादर बिछाकर केवल बजट खपाने और कागजी खानापूर्ति करने की बिसात बिछाई जा रही है।
मरम्मत या महज दिखावा?
रिंग रोड की हालत किसी से छिपी नहीं है। भारी वाहनों के पहियों तले कराहती इस सड़क पर गिट्टी-डामर का महज छिड़काव कितने दिन टिकेगा, यह किसी तकनीकी विशेषज्ञ से पूछने की जरूरत नहीं। राहगीरों का कहना है कि यह तथाकथित पैचवर्क भारी वाहनों के चंद फेरों और पहली बारिश में ही हवा-हवाई साबित होगा। मजबूत, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़क बनाने के बजाय विभागीय अमला गड्ढों पर पर्दा डालकर "सुगम आवागमन" का गुलाबी दावा ठोकने में जुटा है।
कमर टूटती रहे, पहिए धंसते रहें... कमीशन का खेल बदस्तूर जारी
घटिया पैचवर्क से न तो हादसों का जोखिम कम होने वाला है और न ही राहगीरों को कमरतोड़ झटकों से निजात मिलने वाली है। सबसे बड़ा और कड़वा सवाल यही है कि हर बार घटिया और गुणवत्ताविहीन सड़कों की बलि जनता क्यों चढ़े? जब हर साल सड़कों के नाम पर लाखों-करोड़ों का फंड जारी होता है, तो निर्माण के कुछ ही महीनों में ये सड़कें छलनी क्यों हो जाती हैं? जनता के टैक्स के पैसे पर ठेकेदार-इंजीनियर गठजोड़ की यह मेहरबानी कब तक चलेगी?
शहरवासियों का दोटूक कहना है कि यदि प्रशासन ने तात्कालिक लीपापोती की आदत छोड़कर रिंग रोड का नए सिरे से मानक स्तर पर निर्माण नहीं कराया, तो यह थूक-पॉलिश बहुत जल्द उखड़कर लोक निर्माण विभाग के दावों और कार्यशैली की पोल सड़क पर ही खोल देगी।
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