ब्रेकिंग

ब्रांडेड शोरूमों के भ्रामक प्रचार के खिलाफ सराफा व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन, 'समान नीति' और सख्त नियमों की मांग

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 5 सितंबर तक, अब तक 1944 मरीजों की जांच

साहब की दबंगी, सफाईकर्मियों पर बरसाए 'प्रशासनिक' थप्पड़

बोल बम' के जयघोष से गुंजायमान होगी सूरजपुर नगरी,16अगस्त को ऐतिहासिक जमड़ी धाम के लिए प्रस्थान करेगी भव्य कांवड़ पदयात्रा

सूरजपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर दिखा भव्य नजारा, पर चरमराई यातायात व्यवस्था और DJ के शोर से लोग रहे परेशान

सूचना

: लाठी डंडा से मारकर हत्या करने वाले को आजीवन कारावास

Admin

Thu, Sep 2, 2021

 बैजनाथ केशरी

बलरामपुर-रामानुजगंज

रामानुजगंज--------  आपसी विवाद को लेकर एक युवक को लाठी डंडे से मार कर हत्या करने वाले  हत्यारे पस्ता थाना अंतर्गत ग्राम परसवार खुर्द चौकी डबरा का रहने वाला  26 वर्षीय राजू उर्फ सूधु उर्फ हीरासाय शांडिल्य पिता भगवान दास  को द्वितीय अपर सत्र के विद्वान न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 200 रुपए से अर्थदंड से दंडित किया है अर्थदंड अदा न किए जाने पर 2 माह अलग से सश्रम कारावास की सजा की प्रावधान है। राज्य द्वारा लोक अभियोजक विपिन बिहारी सिंह थे । इस संबंध में बताया गया कि घटना दिनांक 21 अक्टूबर 2017 को जब प्रार्थी सैनाथ के द्वारा मर्द इंटीमेशन दर्ज कराया गया रात्रि 12 बजे के करीब मृतक घिनू पैकरा तथा इसके पड़ोस में रहने वाली बहन राजमाइन अपने घर के पास खड़े थे की अभियुक्त के द्वारा घिनू पैकरा के साथ लाठी डंडा से मारपीट करने लगा जिससे वह घायल हो गया और शरीर के कई जगहों पर चोट भी लगा हुआ था जिला अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया जहां उसका 6 नवंबर 2017 को मृत्यु हो गई प्रार्थी के रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। अपने आदेश में न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने लिखा है कि यह अवधारित किया जाना उचित होगा कि न्यायालय को ना केवल अपराध की प्रकृति उसके लिए विहित दंड समाज की आवश्यकताओं एवं आयुक्त के प्रति उपशमनकारी एवं गुरुतरकारी परिस्थितियों के प्रति ही ध्यान नहीं देना है बल्कि अपराध के पीड़ित एवं उसके आश्रितों को न्याय प्रदान करने की आवश्यकता को भी विचार में रखना होगा। बिधाई परिवर्तनों एवं शीर्ष न्यायालय के विनिस्चयो के बावजूद यह पहलू ध्यान देने से बच जाता है एवं उसकी आश्रितों की दुर्दशा कि यहां तक की जब भी उपेक्षा की जा सकती है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अपराध अदण्डित ही रह जाता है। पीड़ित अथवा आश्रितों को न्याय संगत मुआवजे का निर्धारण चिकित्सा एवं अन्य ब्ययो पीड़ा एवं कष्ट उपार्जन की हानी और अन्य सुसंगत कारको का ध्यान में रखकर किया जाना है।

मृतक के पुत्र को क्षतिपूर्ति राशि देने की अनुशंसा-----------  द्वितीय अपर सेशन न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने दिए गए आदेश में लिखा है कि मृतक के परिजनों को मुआवजे का भुगतान राज्य द्वारा किए जाने के संबंध में विस्तार में प्रतिपादित मार्गदर्शक सिद्धांत के आलोक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलरामपुर , जिला बलरामपुर - रामानुजगंज, छत्तीसगढ़ समुचित जांच उपरांत निर्णय प्राप्ति दिनांक से 3 माह की अवधि के भीतर क्षतिपूर्ति योजना 2011 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि से मृतक घिनू पैकरा के पुत्र  को मृतक की मृत्यु के संबंध में पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की गई है।।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें