: शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने वाले को 10 वर्ष की सश्रम कारवास की सजा.......
Admin
Sat, Jul 17, 2021बैजनाथ केशरी
रामानुजगंज-------- शादी में गई किशोरी के साथ पहले जबरन अनाचार करने के बाद उससे शादी करने के बहाने पुनः कई मर्तबा दैहिक शोषण किया गया तत्पश्चात वह किशोरी गर्भवती हो गई । पीड़िता के परिजनों के द्वारा आरोपी से शादी करने की बात कही गई लेकिन वह इंकार कर दिया तत्पश्चात किशोरी के रिपोर्ट पर कुसमी थाना ने अपराध पंजीबद्ध कर लिया था। समस्त बयानों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) विशेष न्यायालय( एफटीसी) के न्यायाधीश वंदना दीपक देवांगन ने थाना कुसमी अंतर्गत निवासी ग्राम थानपारा के 19 वर्षीय राजा नगेसिया पिता बुटन नगेसिया को धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम के तहत 10 वर्ष की सश्रम करवास एवं 10 हजार रुपए की अर्थदंड, अर्थदंड अदा किए जाने पर 6 माह की अतिरिक्त करवास , धारा 363 और 366 के तहत 5 -5 वर्ष की सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा नहीं की जाने पर 3 - 3 माह की अतिरिक्त करवास की सजा देने की आदेश पारित की गई है। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसपी गुप्ता ने पैरवी किया है। प्रकरण इस प्रकार है कि पिड़ित किशोरी 6 जुलाई 2016 को अपने गांव के एक घर के शादी में गई हुई थी जब वह अपने घर वापस लौट रही थी तो आरोपी ने जबरन जंगल में ले जाकर उससे अनाचार किया फिर शादी का प्रलोभन देने के बहाने उसे प्रतिदिन दैहिक शोषण करता रहा और वह 10 जुलाई 2016 तक ऐसा ही करते रहा, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। यह सब को देखते हुए परिजनों ने अभियुक्त से शादी करने की बात कही लेकिन वह इनकार कर दिया।। तत्पश्चात पीड़िता किशोरी ने कुसमी थाना जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराया जहां पुलिस ने उक्त अभियुक्त के विरुद्ध धारा 376 , ( 2 )(ढ़) एवं 5 ढ / 6 पाक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।।
केवल अपराधी को दंडित करना नहीं--------- अभियुक्त को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए विद्वान न्यायाधीश वंदना दीपक देवांगन ने टिप्पणी किया है की दंड विधि का उद्देश्य न केवल अपराधी को दंडित करना है अपितु संविधान द्वारा निर्मित विधि के प्रति समाज में आस्था को अछुर्ण बनाए रखना है तथा दंड के माध्यम से समाज में अपराध के पुनरावृति को कड़ाई से रोकना भी है वह दंड के माध्यम से अपराधी को अपराध से विमुख करना भी है।।
समाज का भी नैतिक कर्तव्य--------- विद्वान न्यायाधीश ने अभियुक्त को कारवास की सजा सुनाते वक्त अपने आदेश में लिखा है कि समाज का भी नैतिक कर्तव्य है कि महिला के हितों का संरक्षण करें और रिश्ते की मर्यादा का सम्मान करें अभियुक्त का कृत्य न केवल राज्य के प्रति अपराध है बल्कि समाज के प्रति भी अपराध है अतः अपराध की प्रकृति को देखते हुए अभियुक्त को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम के उदार प्रावधानों का लाभ दिया जाना न्यायसंगत नहीं होने से अभियुक्त को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान नहीं किया जा सकता ।।
विज्ञापन
विज्ञापन