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: बिहारपुर क्षेत्र मे स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ खराब.....प्रवस के कुछ घंटो बाद नवजात की हुई मौत..... प्रसुता की हालत गंभीर

पप्पू जायसवाल

बिहारपुर -बिहारपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा खुद बीमार हो कर रह गई है,महतारी योजना का हाल बेहाल है बीमार पड़ने पर क्षेत्र के ग्रामीण दुसरे राज्य मध्यप्रदेश जाकर ईलाज करा रहे है|कोरिया सीमा से लगे रसौकी में रविवार को प्रसव पीड़ा से परेशान महिला चाह कर भी अस्पताल तक नही पहुच पा रही और घर मे प्रसव तो हुआ लेकिन बच्चे की मौत हो गई और महिला की हालत नाजुक बनी हुई है। बताया जाता है कि बच्चा भी अविकसित हुआ था जो गांव के लिए कौतूहल का विषय बन हुआ है। ओड़गी ब्लॉक के चाँदनी जैसे दुरुस्त इलाके में अभी भी स्वास्थ्य सुविधा एक सपने जैसा ही बना हुआ है।स्वास्थ विभाग के योजनाओ की जमीनी हकीकत बिहारपुर चांदनी क्षेत्र आसानी से देखने को आये दिन मिल ही जाता है। किस तरह योजनाये सिर्फ कागजो मे संचालित है जिसका जागता उदाहरण बिहारपुर चांदनी का क्षेत्र रसौकी सहित 6 गांव बना हुआ हैं। जहा पर महतारी एक्प्रेस सहित अन्य सुविधा बंद है। रसौकी निवासी महिला लोली कुवंर प्रवस दर्द से तडपते रही तो वही गांव मे स्वास्थ सुविधा नही मिलने पर प्रवस उपरांत नवजात की मौत हो गई तो वही प्रसुता का स्वास्थ गंभीर बनी हुई है गांव के जानकार उपचार मे लगे हुए है। 

जन्मजात विकृति,लोगो मे कोतुहल..... 

रसौकी मे प्रवस के दौरान नवजात की सांसे कुछ देर चलने के बाद आखिरकार थम गई तो वही नवजात जन्मजात विकृत हुआ था जिसके बच्चे का शरीर का हाथ पैर अन्य अंग विकसित नही हुये थे। सिर की बनावट एक अलग तरह का था बच्चे की पुछ जैसी कुछ निकली हुई थी जिससे ग्रामीण मे कोतुहल का विषय  था। 

उपस्वास्थ केन्द्र रहता है बंद... 

स्वास्थ विभाग की कागज मे रसौकी गांव मे उप स्वास्थ केन्द्र है और स्वास्थ कार्यकर्ता पदस्थ भी है पर हमेशा उप स्वास्थ केन्द्र बंद रहता ना तो यहा स्वास्थ संबंधी किसी तरह की गतिविधिया संचालित  है। चार पांच गांव को मिलाकर एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ महिला सहित दो की पदस्थापना थी। लगभग एक साल पहले महिला स्वास्थ कार्यकर्ता को निलंबित कर दिया गया था। जिससे गांव की महिलाओ को अपने पीडा बताने मे असहज महसुस करती है।

जननी सुरक्षा योजना का हाल बेहाल.... राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य गरीब गर्भवती महिलाओं के संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है. केंद्र सरकार इसके लिए गर्भवती महिलाओं को आर्थिक मदद देती है लेकिन यहाँ गरीब ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है|

कागजो में संचालित महतारी जतन योजना ...

इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक गर्म भोजन दिन में एक बार दिया जाता है प्रतिदिन २५० ग्राम पूर्ण गर्म आहार और टीएचआर के रूप में १०० ग्राम रेडी-टू-ईट दिया जाता है।छत्तीसगढ़ के आंगनबाडी केंद्रों में २.५ लाख से अधिक गर्भवती माताओं को सप्ताह में ६ दिन पौष्टिक भोजन निशुल्क प्रदान किया जाता है।

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