: लाक डाउन के 30 दिनो 116 लोगो की हुई मौत....मौत का अस्पताल बना कोविड अस्पताल....लगातार हो रही मौतों ने किया स्तब्ध....
Admin
Thu, May 13, 2021
24 घंटो में 13 की हुई मौत.... नेतृत्वविहीन हुआ सूरजपुर जिला....गुटबाजी के सामने नतमस्तक हुआ जिला प्रशासन....
राजेश सोनी
सूरजपुर. जिले में कोरोना की दूसरी लहर इस कदर बेकाबू है कि प्रतिदिन न केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है बल्कि मौत के आंकड़े भी लोगो को डरा रहे है.13 अप्रैल को लगाये गये लाक डाउन मे 30 दिनो में 116 लोेगो की मौत कोरोना संक्रमण से हो गई है. बीती चैबीस घंटे में 13 लोगो की मौत ने शहर को स्तब्ध कर दिया है. कोरोना की गति को देखते हुए सूरजपुर जिला प्रदेश में अव्वल आने की कतार में आ गया है. शासन प्रशासन की व्यव्स्था की दृष्टि से जिला नेतृत्वविहिन नजर आ रहा है. सत्तापक्ष से कई मंत्री विपक्ष से भी केन्द्रीय राज्य मंत्री व्यवस्था के नाम पर जनता को मिला सिर्फ आश्वासन, किन्तु अभी जरूरत है, उपचार की, न कि आश्वासन की. जनप्रतिनिधि सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाजी तक सीमित है जबकि जनता की वास्तविक जरूरत तक पहुंचने की दिलचस्पी नहीं. जनप्रतिनिधि जब सक्रिय नही ंतो वे अफसरों पर भी लगाम नहीं कस पा रहे हैं. इस स्थिति में जिले की गरीब जनता उपचार के अभाव में रोज दम तोड़ती नजर आ रही है. उल्लेखनिय है कि कोरोना की दूसरी लहर से लाक डाउन के 30 दिनो में 12492 लोग संक्रमित मिले तो वही 116 लोगों की मौत हुई. अधिकांशतः लोग स्वयं के उपचार से घर पर ही स्वस्थ हो गये, किन्तु बेबश, लाचार गरीब लोग के लिए जिनके पास उपचार के लिए पैसे नहीं है, उन्हें सरकारी व्यवस्थाओं का मुंह देखना पड़ रहा है. वे लोग सिर्फ और सिर्फ शासन द्वारा दी जानी वाली व्यवस्थाओं के ही भरोसे हैं. ठीक हो गये तो भगवान भरोसे नही ंतो सीधे भगवान के द्वार. क्या करें लाॅक-डाॅउन के कारण चलने वाली रोजी-रोटी भी छिन गई और उसके बाद गंभीर बीमारी की चपेट में आने के बाद उस गरीब की सुनने वाला कोई नहीं है. सूरजपुर जिला चिकित्सालय जहां कोविड का जिले का प्रमुख उपचार केन्द्र बनाया गया है, जहां बताया गया है कि सभी तरह के गंभीर कोरोना मरीजों का उपचार किया जायेगा. हालत यह है कि साधारण कोरोना मरीज के उपचार की व्यवस्था भी यहां नहीं है, गंभीर मरीज के ईलाज की बात तो दूर. कोविड अस्पताल जिन चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है वे अपने घर से निजी क्लीनिक के माध्यम से उपचार करना ज्यादा बेहतर समझते हैं और दवाई व टेस्ट फिक्स दुकान से ही होना तय है, यहां भी गरीब की सुनवाई नहीं है. चिकित्सालय में उपचार हुआ तो ठीक नही ंतो दिन-दिन भर मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. चिकित्सालय में कोरोना मरीज के लिए पर्याप्त दवाईयां भी नहीं है. गंदगी का आलम इतना है कि वहां जानवर भी न रहे, किन्तु बेबश गरीब की मजबूरी ईलाज के लिए उसे उस गंदगी के आलम में चिकित्सालय में उपचार कराना पड़ रहा है. शौचालय, स्नानागार की स्थिति बद से बदतर है. बेहतर उपचार नही कर सकते तो मरने के बाद तो कुछ राहत दे देते लेकिन ऐसा नही है मरने के बाद भी शव के लिये मृतक के परिजनो सुबह से शाम हो जाता है. 12 मई को 5 बजे ग्राम करौटी के 70 वर्षीय कोरोना संक्रमित होने पर उसे भैयाथान से जबरदस्ती कोविड अस्पताल भेजा गया जबकि परिजन इसके लिये विरोध भी किये. यहा उपचार के दौरान मात्र इंजेक्शन लगाया गया. रात में तबियत अंत्यंत गंभीर होने पर उनके साथ मे रही उनकी बहु ने डाक्टरों से मदद करने करने के लिये दौड लगाई लेकिन धरती के भगवान कोविड अस्पताल में ना तो उपलब्ध थे ना ही उन्हे समुचित इलाज मिल पाया. इलाज के अभाव में आखिरकार उनकी मृत्य हो गया. परिजनों ने बताया कि उनका बीपी लो था, उनका मानना था कि अगर अस्पताल नही लाये रहते तो आज वे जीवित रहते. इसी तरह मानपुर निवासी फिरोज ने बताया वे चार मई को अपने पिता को भर्ती किये थे डाक्टर तो जाते नही थे ठीक तो अपने से हो गये. कल रात को वे गंभीर हो गये और चक्कर आने लगा था. वह घर से अस्पताल जाकर डाक्टर आवास पर गये तो वहा मैडम ने डायजिंन का सिरप बस दे दिया, जबकि उसने मरीज की पूरे हालात उनको बता दिया था. डाक्टर तक देखने नही गये जिससे उनके पिता की मौत हो गई. तो वही एक की दिन में कई मौतों की वजह से वे अपने खुद की वाहन से शव लेकर गये. लगातार हो रही मौत से आक्रोशित परिजन खुलकर सामने आकर अस्पताल की अवस्थाओ की पोल खोल रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जिले के लोग अपनो को खोते हुए जिले के मंत्रियो, नेताओ, प्रशासन को जमकर कोस रहे हंै. कई युवा और बुजुर्ग संक्रमित होकर मौत के गाल में समा गये है कोरोना संक्रमितो की बढते रफ्तार से जिले की स्वास्थ व्यवस्थाएं भी ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है. तो वही स्वास्थ विभाग में चल रहे गुटबाजी का असर स्वास्थ सेवाओ के साथ व्यव्स्थाओ पर पड रही है जिससे स्वास्थ व्यव्स्था बेलगाम हो गया है. कोविडि अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजो अनुसार यहा का यह हाल है कि डाक्टर तक अस्पताल मे नही आते है नर्से जरुर आती है बहरहाल कोरोना सक्रमित मरीज भगवान भरोसे है.
शासन-प्रशासन के शून्य हो जाने से जिला हुआ नेतृत्व विहीन
पक्ष हो या विपक्ष सब तमाशा देख रहे है, सत्ता पक्ष की बात करे तो जिले में एक कैबिनेट मंत्री एक संसदीय सचिव एक केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त सरगुजा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वरिष्ठ विधायक सत्ता पक्ष कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता ग्राम पंचायत जनपद पंचायत जिला पंचायत नगर पंचायत नगर पालिका सब पर कांग्रेस. कैबिनेट मंत्री को इस जिले से कोई लेना देना नही है ढाई वर्ष के कार्यकाल में सूरजपुर के उपलब्धि शून्य है. संसदीय सचिव अपनी विधान सभा तक सीमित रहते हैं और रही बात जिला मुख्यालय के विधायक की तो वे स्वयं लम्बे समय से अस्वस्थ है और उनके दामाद मोह के कारण पूरा जिला अस्वस्थ हो गया है. जिला चिकित्सालय के मुखिया के खिलाफ कौन बोले और कौन कार्यवाही करे. उसके बाद बात करे विपक्ष की तो सांसद केंद्रीय राज्य मंत्री कई वरिष्ठ नेता कई पूर्व बड़े ओहदेदार प्रदेश के कद्दावर नेता होने के बाद सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाजी तक ही सीमित रहते हैं.
खामियाजा भुगत रही गरीब जनता
जिसके पास खाने को पैसे नही वे मजबूर है, यहाँ उपचार कराने के लिए और अपनी जान जोखिम में डालने के लिए सिर्फ सरकारी चिकित्सा के भरोसे ही हैं और दूसरी ओर राज्य, केन्द्र सरकार इस गरीब जनता के लिए कई अरबों रूपये का स्वास्थ्य के नाम पर बजट आवंटित कर रही है, तो फिर इन्हें स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं मिल रही…? शासन के द्वारा गरीबों के उपचार के लिए बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, किन्तु वे सब महज दावे ही हैं, हकीकत नहीं. बड़ें लोग तो पैसे से कहीं भी उपचार करा अपनी जान बचा लेते है, परन्तु इन गरीबों की कौन सुनेगा.
इन दिनो कहाँ है किसी को पता नही, जनप्रतिनिधि और उनके प्रतिनिधि
इस महामारी के दौर में आम जनता को अपने जनप्रतिनिधियों की ज्यादा आवश्यकता है. जिस दिन के लिए उसने अपने जनप्रतिनिधि को चुना था किन्तु वे सब इस महामारी में सहयोग करने के बजाये क्षेत्र से ही लापता हैं. इन जनप्रतिनिधियों ने अपनी अनुपस्थति में कार्य करने के लिए संविधान के विपरीत जाकर कई दर्जन प्रतिनिधि बनाए थे, पर वे भी कहाँ है…? गरीब जनता के लिए इस विपरीत परिस्थिति में प्रतिनिधि ही सहारा बन जाए तो उन्हें ही अपना मसीहा मान लेते.
गुटबाजी के सामने नतमस्तक हुआ जिला प्रशासन
इस महामारी के दौर में जनता के सामने जनप्रतिनिधि तो पूर्णतः अपने परीक्षा में फेल नजर आ रहे हैं, अब जनता की आस जिला प्रशासन व स्वास्थ्य अमले पर टिकी है, किन्तु उनका भी रवैया जनप्रतिनिधियों जैसा सिर्फ आश्वासन पर टिका है. रही बात प्रशासन की तो उन्हें क्या जब जिस जनता के भरोसे ये सभी जनप्रतिनिधि बने कुर्सी पर आसीन हुए जब उन्होंने ही जनता को उनके हाल पर मरने को छोड़ दिया तो अफसरो का क्या वे आज इस जिले कल दूसरे जिले. इनकी नौकरी पर तो कोई परेशानी है ही नही, इनकी तनख्वाह भी पूरी, शान-ए-शौकत भी पूरे, मरें तो सिर्फ गरीब जनता.
कमिया है सुधार की आवश्यकता है चिंतन करेगे मृत्यु दर ज्यादा होना चिंतनिय है -डा0 आर एस सिह मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ अधिकारी
कोविड अस्पताल की अव्यव्स्था और लगातार हो रही मृत्यु को लेकर जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 आर0एस0 सिह से चर्चा करने पर उन्होने बताया कि स्वास्थ विभाग की चुक तो है और कमियो को भी स्वीकार किया. सुधार की आवश्यकता को बताते हुये कहा कि प्रत्येक फ्लोर अलग अलग चिकित्सा दल तीन शिफ्ट में डयूटी लगाई गई है और व्यव्स्था को सुधारने की बात कही है मृत्यु दर ज्यादा होने को चिंतनिय बताते हुये इसमे भी सुधार करने की बात कही है चिकित्सालय में गुटबाजी के सवाल को खारिज कर दिया.भविष्य में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी.
विज्ञापन
विज्ञापन