: आरक्षक की वाहन चोरी हुये गुजर गये 3 वर्ष…अब तक बरामद नही कर सकी पुलिस…?आईजी, एसपी से किया था शिकायत…पिडित ने लेनदेन का लगाया आरोप….
Admin
Mon, Dec 13, 2021
राजेश सोनी
सूरजपुर. जिले में अजब गजब की पुलिसिंग व्यव्स्था देखने को मिल रही है गुडे बदमाशो बेखौफ है तो वही क्षेत्र में माफिया राज है, चोरी की गतिविधियां लगातार जारी है. बात करे आरक्षक की स्कार्पियो चोरी हुए करीब तीन साल गुजर गए पर अबतक पुलिस उन आरोपियो तक नहीं पहुँच सकी है जिनके पास चोरी गई वाहन होने की बात, मामले में पकड़े गए आरोपियो ने पुलिस को दिए बयान में बताया है उन आरोपियो की धर पकड़ के लिए पुलिस महानिरीक्षक से प्रार्थी आरक्षक राजेश पटेल मिलना चाहता था जिसके लिए उसने पुलिस अधीक्षक से अनुमति हेतु आवेदन दिया था. आरक्षक श्री पटेल का आरोप है कि अनुमति देने की बजाय उसे भगा दिया गया है. आरक्षक ने पूर्व में भी 11 जुलाई 2019 को तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक को दिए अपने शिकायत पत्र में पुलिस टीम में शामिल लोगों पर आरोपियो से रिश्वत लेने का गंभीर आरोप भी लगाया था. ज्ञात हो कि आरक्षक राजेश पटेल के घर के सामने से खड़ी स्कार्पियों वाहन 9 जनवरी 2019 को चोरी हो गई थी. मामले की जानकारी लगते ही आरक्षक की रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर बकायदा पुलिस की टीम गठित कर आरोपियों तक पहुंचा गया, टीम में प्रार्थी आरक्षक भी शामिल था. टीम ने झारखंड में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद कुछ को छोड़ दिया था साथ ही आरक्षक राजेश को जांच से हटाकर ओड़गी थाना में स्थानांतरण कर दिया गया इसके बाद आरक्षक लिखित आरोप लगाया था कि वाहन चोरी के आरोपी झारखण्ड और बिहार के राजनीतिक रसूखबदार लोग होने और शराब माफियाओं से जुड़े हैं साथ ही रांची का रहने वाले रणजीत सिंह और विशाल गुप्ता को तीन दिन हिरासत में रखकर बिना कार्रवाई किए छोड़ दिया गया. उन्होंने अपने अधिकारियों पर रणजीत सिंह से तीन लाख, विशाल गुप्ता से तीन लाख, अशरफ अली से साढ़े सात लाख और शम्भू यादव से एक लाख तीस हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. आरक्षक राजेश पटेल के अनुसार उसकी स्कार्पियों बिहार पटना के जानीपुर इलाके में शराब माफिया राजा पासवान के पास है बावजूद इसके पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है आज लगभग 3 साल गुजरने को है लेकिन अभी तक पुलिस विभाग अपने खुद के विभाग के आरक्षक के चोरी किये गए वाहन को बरामद नहीं कर पाई है तो समझा जा सकता है कि अन्य मामलों में पुलिस की कार्य प्रणाली कैसी होगी. पिडित ने डीजीपी सहित रायपुर मंत्रालय से पत्र भी लिखा लेकिन किसी प्रकार की उसकी सुनवाई नही हुई. सुचना के अधिकार के तहत जानकारी भी मांगी लेकिन नही दिया गया. पिडित ने बताया कि उसने लोन लेकर वाहन को खरीदा था जो चोरी हो गया, अपने ही विभाग से प्रताडित है उसे न्याय नही मिल सका इसलिये वह अब न्यायलय का सहारा लेने को मजबुर है.
प्रोफेशनल केस है देखते है क्या किया जा सकता है
आरक्षक यहाँ पर आया था प्रकरण में संबधित थाना प्रभारी के स्थानांतरण के बाद फिर से केस डायरी प्रभारी को भेजा गया,यह बहुत प्रोफेशनल केस है कुछ की गिरफ्तारी हुई थी और कुछ फरार थे. आगे देखते है क्या किया जा सकता है.आरक्षक की सुनवाई कर थाना भेजा गया था-भावना गुप्ता,पुलिस अधीक्षक
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