: न्याय के लिये दर भटकती रानु बेक....जुल्म उत्पीडन के शिकार हुये आदिवासियों को न्याय तक नसीब नही...अजजा आयोग के अध्यक्ष से न्याय की लगाई गुहार...
Admin
Mon, Dec 6, 2021
राजेश सोनी
सूरजपुर. अम्बिकापुर में पुलिस अभिरक्षा में आदिवासी युवक पंकज बेक की हत्त्या हुये ढाई साल से ज्यादा समय हो गए ,मृतक के परिजन आज भी न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं तो वही हत्यारे हत्यारे पुलिसकर्मी अलग अलग थानों में नौकरी करते हुए मौज काट रहे हैं,मामला उच्चन्यायालय, अनुसूचित जनजाति आयोग, मानवाधिकार में कोविड के वजह से लंबित है. सरगुजा रेंज मुख्यालय मे हुई इस घटना के बाद से 4 आईजी बदल चुके हैं, प्रदेश की पुलिस व्यवस्था कितनी बेहतर है किसी से छुपा नहीं है, ऐसी घटनाएं समाज मे पुलिस से खुद के लिए असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं पर फर्क किसे पड़ता है. हर आईपीएस जिले में, रेंज में जॉइनिंग के समय मीडिया में बने रहने बड़ी - बड़ी बातें कहता है फिर अंततः समय के साथ इस व्यवस्था में सेट हो जाता है. आज फिर से मृतक पंकज बेक की पत्नी रानूबेक राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिह के समक्ष अपनी पीड़ा लेकर उपस्थित हुई, न्याय की उम्मीद में एक बार फिर से अपने पति के हत्त्यारों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आवेदन दिया है. तो वही अजजा आयोेग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिह ने पुरे मामले की वैधानिक कार्यवाही कर पिडित को न्याय का दिलासा दिया. गौरतलब है कि जिला सूरजपुर के अधिना सलका निवासी पंकज बेक को चोरी के आरोप में 21 जुलाई 2019 को सरगुजा जिले के कोतवाली थाने में बुलाया गया था इसके दूसरे दिन उसका शव अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल की खिड़की से लटका हुआ मिला था. मृतक की पत्नी रानु बेक ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रदेश सहित केन्द्र की सभी संवैधानिक संस्थाओं से की थी. जिस मामले को लेकर भाजपा ने मुददा भी बनाया था जिसकी गुंज विधानसभा तक उठी थी इसके बाद सत्ता पक्ष के और विपक्ष के सभी बडे नेता मृतक पंकज बेक की पत्नी रानु बेक से मिलकर इतनी ज्यादा सात्वना दे दी थी कि रानु बेक को लगा था कि उसके पति के हत्यारे जेल की सलाखो के पीछे होगा. प्रदेश के केबिनेट मंत्री की रिश्ते में रानु बेक भतीजी लगती है ढाई वर्षो के बाद भी इंसाफ न्याय की आश लिये रानु बेक दर दर भटक रही है.
विधवा पेंशन तक नसीब नही
नेता मंत्री अधिकारियांे की बातो पर कभी विश्वास नही करना चाहिये, ना सरकारी योजनाओ पर. कुछ ऐसा ही रानु बेक के साथ हुआ उसके पति की मौत हुये दो ढाई साल हो गये लेकिन अभी तक उसका विधवा पेशन का कार्ड तक नही बना है.सात्वना उसे खुब मिली. एक तरफ पति की मौत का दर्द, दूसरी तरफ बच्चों को पालने की जिम्मेदारी, ऊपर से अपनो की बेरुखी.इतने चुनौतियो की बावजुद रानु बेक अपने पति को न्याय दिलाने के लिये जददोजेहद कर रही है.

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