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: वन्यजीव तस्करी का गढ़ बना सूरजपुर जिला...बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी...

Admin

Tue, Oct 18, 2022

राजेश सोनी

सूरजपुर. तेंदुआ व बाघ के खाल तस्करी के मामले में पकड़े गए सभी 6 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है इस मामले में वन विभाग को अभी कुछ अन्य आरोपियों की तलाश है।लेकिन इस वन्य जीव के खाल बरामदगी से यह तय हो गया है कि बिहारपुर क्षेत्र में केवल लकड़ी तस्कर ही नही बल्कि वन्य जीव तस्कर भी सक्रिय है इन तस्करों के सामने या तो वन विभाग नतमस्तक है या उनके सरंक्षण में यह सब खेल चल रहा है.इतना ही नही वन विभाग का मुखबिर तंत्र भी मजबूत दिखाई नही पड़ता है तभी तो दो वन्य जीव की हत्या कर खाल बेचेते समय धरे गए, जबकि हत्या आज नही की गई होगी बल्कि यह कम से कम एक वर्ष पूर्व हत्या की गई होगी तब तो आज खाल बेचने की कोशिश की जा रही थी..!अब जब मध्यप्रदेश से मुखबिरी हुई और जबलपुर की टीम सक्रिय हुई तो 6 तस्कर पकड़े गए शेष अन्य की तलाश की जा रही है वन विभाग पूरे मामले की जांच का दावा कर रहा है और दावे के मुताबिक अब एक एक चहेरे बेनकाब होंगे. सवाल यह भी है क्या केवल यही दो वन्य जीवों की हत्या हुई है या कुछ और इसका सटीक जानकारी किसी के पास नही है. सूत्र तो जो दावा करते है उंसके अनुसार हाथी दांत,भालू के अंग,हिरन,बाघ, तेंदुआ आदि के खाल आदि इस क्षेत्र में सब मिलते है जिसकी जानकारी विभाग को भी है..? 

गुरु घासीदास उद्यान से लगा है क्षेत्र

ओड़गी ब्लॉक के कई गांव गुरु घासीदास रिजर्व फारेस्ट से लगे हुए है और कई गांव शामिल भी है इस रिजर्व फारेस्ट में बाघ ,तेंदुआ सहित तमाम अन्य वन्य जीव रहते है जंगलों में रिहायशी बस्ती हो जाने से कई बार मवेशियों के शिकार की खबरें सामने आती रही है ऐसे में जाहिर है कुछ ग्रामीण इरादतन ऐसे वन्य जीवों की हत्या कर देते होंगे जबकि तस्करी के लिए अलग...! लकड़ी तस्कर तो सक्रिय है ही जो यहां से बहुमूल्य लकड़ी काट कर जंगलों को न केवल वीरान कर रहे है बल्कि मध्यप्रदेश में ले जा कर खपा रहे है सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण तस्करों की चांदी हो जाती है लेकिन इन सब के बीच प्रश्न यह है कि वन विभाग वन्य जीवों के सरंक्षण से लेकर तस्करी रोकने,जंगल कटाई आदि पर अंकुश के लिए प्रतिमाह करोड़ो खर्च कर भारी भरकम स्टाप की तैनाती किये हुए है तो आखिर उनकी भूमिका मैदानी स्तर पर क्या है और क्यों नही जब ऐसे मामले सामने आते है तो उनकी भूमिका की जांच होती..? जब उनकी भूमिका की जांच और जबावदेही तय नही होती,शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी सामने नही आती तो फिर अफसर भी संदेह की दायरे में नही है...? सूरजपुर जिले में प्रभारियों के भरोसे रेंज सन्चालित है वर्षों से अधिकारी ,कर्मचारी एक ही जगह पर जमे हुए है क्या यह तस्करों से गठजोड़ के लिए काफी नही है...! इन तमाम पहलुओं पर विचार कर जंगल के सरंक्षण के साथ वन्य जीवों की हत्या पर रोक लगाने की दिशा में समुचित पहल की जानी चाहिए ताकि जिले की पहचान बरकरार रहे।

29 तक आरोपी भेजे गए न्यायिक रिमांड पर

रविवार को तेंदुआ व बाघ के खाल के साथ 6 लोग पकड़े गए है जिन्हें आज अदालत में प्रस्तुत किया गया जहाँ से उन्हें 29 अक्टूबर तक जेल भेज दिया गया है जिन्हें जेल भेजा गया है उनमें लुल का राजाराम,उमझर का बालसिंह, नवगई का भुनेश्वर, घुईडीह का रामसूरत,छतरँग का मंगल सिंह ओर देवसिंह शामिल है वन विभाग ने इन पर वन्य जीव सरंक्षण 1972 की धारा 9,39,44,48 क,49 ख,50 स 51..1 व 57 के तहत जुर्म दर्ज किया है.

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