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: विश्व दृष्टि दिवस - दुनिया का अंधेरा मिटाएं, आंखों में उजियारा लाये....

Admin

Sat, Oct 15, 2022

सूरजपुर.  विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर 11 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन डॉक्टर तेरस कवर नेत्र सर्जन जिला चिकित्सालय सूरजपुर के द्वारा किया गया साथ ही सभी ब्लाक में विश्व दृष्टि दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सहायक नोडल अधिकरी मुकेश राजवाड़े ने बताया कि जिले में मोतियाबिंद मुक्त कार्यक्रम भी चलाया रहा है तथा विश्व दृष्टि दिवस के क्रम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवप्रसाद नगर, पूर्व माध्यमिक शाला पीढ़ा में विश्व दृष्टि दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया व बच्चों का नेत्र परीक्षण अमित चौरसिया, मारूतीनंदन, नेत्र सहायक चिकित्सा अधिकारी द्वारा किया गया. अक्टूबर माह के दूसरे गुरुवार को यह दिवस धुंधली दृष्टि, अंधापन के साथ-साथ दृष्टि संबंधित समस्याओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जा रहा है. भारत में नेत्र रोगों के प्रति आज भी सजगता और सतर्कता नहीं है और यही कारण है कि घर घर में बच्चे से बुजुर्ग तक नेत्र रोगी मिल जायेंगे. आँखों के स्वास्थ्य को बनाए रखना केवल एक व्यक्ति का ही कर्तव्य नहीं है बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. भारत में करीब करीब 3.5 मिलियन लोग ऐसे है जो नेत्रहीन है हर साल भारत में 30,000 नए मरीज ऐसे जन्म लेतें है जो जन्म से ही नहीं देख सकते है. दृष्टि दोष के प्रमुख कारणों में असंशोधित अपवर्तक कमियां 43 प्रतिशत और मोतियाबिंद 33 प्रतिशत हैं. अधिकांश अंधेपन यानि लगभग 80 प्रतिशत का बचाव उपचार या रोकथाम से किया जा सकता है.आंखों की देखभाल बाल्यकाल से ही की जानी चाहिए. किसी भी बच्चे की आंखों की पहली बार जांच पांच साल के होने तक हो जानी चाहिए। इस उम्र में अगर बच्चे की आंखों में किसी प्रकार का बहंगापन, आंखों का छोटी-बड़ी होना या और भी कोई परेशानी रहती है तो वह इसी अवस्था में ठीक हो जाती हैं। इसी तरह किशोर और युवा अवस्था में भी आंखों की नियमित जांच जरूरी है। आंखों की समस्या से आज का युवा ज्यादा परेशान हैं क्योंकि वह अपना ज्यादतर समय कंप्यूटर, मोबाइल फोन, रंगीन टीवी, वीडियो गेम और टैबलेट पर बिताते हैं। उनकी यह बेपरवाही और लापरवाही उन्हें असमय आँखों का दुश्मन बना देती है और यह दंश उन्हें ताउम्र झेलना पड़ता है। यह देखा गया है कि 15 से 40 साल तक के स्वस्थ इंसान में आंखों की समस्या नहीं होती। इस दौरान कोई खास बीमारी ही आंखों की समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। लेकिन 40 साल की उम्र के बाद से आंखों में समस्याएं आनी शुरू हो जाती हैं। अगर आप 60 साल से ऊपर के हैं तो कम समय के अंतराल पर नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं और डॉक्टरों के निर्देशानुसार चश्मे का लेंस बदलवाएं। आज जहां उम्र के साथ आंखों की बीमारियों में वृद्धि हुई है। अधिक उम्र में होने वाली आंखों की समस्याएं हैं ग्लाउकोमा, कैटरैक्ट आदि और ज्यादातर स्थानों पर इनका ईलाज आसानी से उपलब्ध है। हमारा आंखें अनमोल हैं और इनसे हम यह खूबसूरत दुनिया देखते हैं, लेकिन आंखों के प्रति हमारी थोड़ी सी भी लापरवाही हमें अंधेपन का शिकार भी बना सकती है। हममें से बहुत से ऐसे लोग हैं, जो आंखों की समस्याओं के शुरूआती लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं और धीरे-धीरे उनमें यह समस्याएं गंभीर रूप ले लेती है। आंखों की देखभाल को भी प्राथमिकता दें। नेत्र रोग विशेषज्ञ और जिला सूरजपुर के सीएमएचओ के अनुसार अपनी आँखों की सुरक्षा हमारी खुद की जिम्मेदारी है। यह सत्य हैं कि आँख है तो जहान है। आंखें स्वस्थ न हों तो संसार की सारी खूबसूरती बेमानी लगती हैं। फिर भी हम अपनी आंखों का पर्याप्त खयाल नहीं रख पाते। डॉ तेरस कवंर के अनुसार हम अपने खान पान का ध्यान रखकर अपनी आँखों को सही सलामत रख सकते है। अच्छी और निरोगी दृष्टि के लिए स्वस्थ आहार का सेवन जरुरी है। अपने संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, फलियों एवं गाजर को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें। धूम्रपान का त्याग कर हम दृष्टि से संबंधित कई तरह की समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। यदि आप कार्यस्थल पर खतरनाक या संकटपूर्ण पदार्थों से काम करते हैं, तो आंखों की रक्षा करने के लिए सुरक्षा चश्मा अवश्य पहनना चाहिए। यदि आप लंबी अवधि तक कंप्यूटर पर काम करते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आप बीच-बीच में उठेंगे और आँखों का सूखापन कम करने के लिए आँखों को अधिक से अधिक बार झपकें। टेलीविजन देखने या कंप्यूटर, लेपटॉप और स्मार्ट मोबाइल पर काम करते हुए एंटी ग्लेयर चश्मा पहनने से आँखों की अपेक्षाकृत सुरक्षा की जा सकती है। मंद और धीमे प्रकाश में न पढ़े। यह आँखों को होने वाली परेशानियों के प्रमुख कारणों में से एक है। इसी के साथ आँखों के बेहतर स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपनी आँखों की नियमित जांच कराएं। विश्व दृष्टि कार्यक्रम में डॉ. तेरस कवंर नोडल अंधत्व, मुकेश राजवाड़े सहा. नोडल, जिला चिकित्सालय सूरजपुर के नर्सिंग स्टाफ जयश्री गांगुली, अंजिता खलखो, विद्यावती, रामेश्वरी, नेत्र चिक.सहा. अधिकारी मारूतीनंदन, अमित चौरसिया, प्रदीप कुजुर, बीएन शर्मा, एस पी मिश्रा, योगेश साहू एवं समस्त विकासखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, व मितानिन सक्रिय रहे.

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