: इधर चलता रहा आंदोलन उधर कर्मचारियों को फोन पर मिलती रही धमकी
Mon, Jul 16, 2018
प्रवेश गोयल
सूरजपुर- जिला मुख्यालय सूरजपुर के रंगमंच में चार सूत्रीय मांगों को लेकर दम भरने वाले संविदा कर्मचारियों को काम से हटा देने की धमकी मिलने लगी है। आमसभा और धरना प्रदर्षन कर रहे कर्मचारियों ने मंच के माध्यम से बताया कि उच्चाधिकारियों एवं विभाग प्रमुखों के द्वारा आंदोलन समाप्त करने का दबाव डाला जा रहा है। वहीं उनके द्वारा मोबाइल से लगातार धमकी दी जा रही है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिषील कर्मचारी महासंघ के द्वारा समस्त अनियमित संविदा, दैनिक वेतन भोगी, केन्द्र व राज्य की योजनाओं में कार्यरत, कलेक्टर दर, मानदेय पर कार्यरत, प्लेसमेन्ट, अंषकालिक, जॉबदर, स्थानीय प्रषासनिक सेवाओ में कार्यरत अन्य किसी भी विधि से नियुक्त, शासकीय, अर्धषासकीय कार्यालयों के अधिकारियों, कर्मचारियों को नियमित करने, प्रत्येक वर्ष प्रषासकीय स्वीकृति और बजट के नाम पर सेवावृद्वि एवं सेवा से पृथक किये जाने का भय समाप्त कर 62 वर्ष की आयु तक वृत्ति सुरक्षा प्रदान करने, विगत 2-3 वर्षो से जिन योजनाओं आबंटन शासन से विभागों में लिया जा रहा हो, किन्तु कर्मचारियों को सेवा से पृथक किया गया हो अथवा छटनी कि गई हो उन्हें सेवा में बहाल करने, शासकीय सेवाओं में आउट सोर्सिग, ठेका प्रथा को पूर्णतः समाप्त किया जावे और वर्तमान में कार्यरत हो, उन्हे शासकीय सेवक का दर्जा दिया जावे तथा ,सामान कार्य समान वेतन करने की मांग को लेकर जिला मुख्यालयों में आंदोलन का शंखनाद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने भाग लिया।
कर्मचारियों के द्वारा सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि चौथी पारी का आधार अनियमित कर्मचारियों को आभार । उन्होंने चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम से स्थानीय प्रषासन को सौंपा। इस दौरान महासंघ के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर हल्ला बोला।
धमकी की नहीं है परवाह, हिम्मत हो तो कार्रवाई करे
सूरजपुर के रंगमंच मैदान में आयोजित प्रदर्षन के दौरान महासंघ के पदाधिकारियों ने अपने उद्बोधन में बताया कि विभाग प्रमुखों और उच्चाधिकारियांं द्वारा इस आंदोलन को कुचलने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है, उन्हें फोन पर आंदोलन समाप्त करने की चेतावनी मिल रही है और न करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी मिल रही है। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि बार-बार फोन आ रहा है, उन्हांने कहा कि फोन क्यों कर रहे हो, हिम्मत है तो कार्रवाई करें। यह महासंघ ऐसी धमकियों से डरने वाला नही है।
: शराब दुकान का ताला तोड़कर चोरों ने उड़ाये डेढ़ लाख
Mon, Jul 16, 2018
आशिक खान
सूरजपुर/रामानुजनगर- ब्लाक मुख्यालय रामानुजनगर में शासकीय शराब दुकान का ताला तोड़कर चोरों ने लॉकर खंगाल दिया, पुलिस ने बताया कि कल देर रात चोरों ने पीछे का दरवाजा खोलकर शराब दुकान में धावा बोला और अलमारी का लॉकर तोड़ते हुए एक लाख 54 हजार 290 रूपये पर कर दिया।
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कल दुकान बंद कर आज प्रातः दुकान खोलने वापस लौटे कर्मचारियों ने जब ताला टूटा देखा तो चोरी का पता चला, चोरी की खबर पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और डाग स्काड का भी मदद लिया, मगर कोई सफलता नहीं मिली, मामले में पुलिस ने अज्ञात चोरों के विरूद्ध धारा 457, 380 के तहत अपराध दर्ज किया है। नागरिकों का कहना है कि लचर पुलिस व्यवस्था के चलते रामानुजनगर चोरी जैसे अपराध बढ़ रहे है, आये दिन चोरी की घटनाएं हो रही है, मगर पुलिस एक भी मामले का खुलासा कर पाने में नाकाम है, नागरिकों ने बढ़ रहे अपराधों पर पुलिस गष्त पर भी सवाल उठाते हुए लापरवाही का आरोप लगाया है, नागरिकों का कहना है कि गष्त के नाम पर पुलिसकर्मी केवल टाईम पास कर रहे है जिससे चोर और असामाजिक तत्व बेखौफ हो गये है, नागरिकों ने पुलिस प्रषासन से इस ओर अविलंब पहल की मांग की है।
: छः माह में ही गड्ढों में तब्दील हो गई 40 लाख की सड़क
Mon, Jul 16, 2018
आशिक खान
सूरजपुर/रामानुजनगर- ग्राम पंचायत मोहरपुर, सुरता सरहद से बोईर गड्ढा मार्ग निर्माण की स्वीकृति गत वर्ष होने के बाद वन विभाग द्वारा घटिया सड़क निर्माण कराने का आरोप लगा ग्रामीणों ने शासकीय राषि के दुरूपयोग के इस मामले की जांच की मांग की है, लगभग तीन किसी की बनाई गई इस सड़क में बारिष के इस मौसम में यह स्थिति है कि इस मार्ग में पैदल चलना भी दुष्कर भरा काम है। ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2017 में मिली थी, जिसमें नियमानुसार सड़क को डब्ल्यूबीएम कर मुरूम डालने का काम करना था, लेकिन निर्माण एजेंसी वन विभाग द्वारा सड़क मार्ग के दोनों साईड सिफ्र मिट्टी डालकर सड़क बना दिया गया और मिट्टी फिलिंग के बाद बगैर रोलर चलाये घटिया मुरूम डालकर सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया, लोगों का कहना है ि कइस मार्ग में पुलिया निर्माण भी आष्चर्य का विषय है, क्योंकि उतना बड़ा नाला ही नहीं है जितना बड़ा की पुल बना दिया गया है, ग्रामीणों के अनुसार पुल निर्माण में भी अनावष्यक 40 लाख रूपये का खर्च हुआ है, जबकि यह पुल निर्माण पांच से सात लाख रूपये में ही हो गया होता, सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न दिये जाने की वजह से पहली बारिष में ही सड़क निर्माणा का पोल खुल गई। छह माह पूर्व निर्मित सड़क का मुरूम पूरी तरह गायब हो चुका है और मार्ग में बड्ढे अथवा बोल्डर ही नजर आ रहे हैं, सड़क में बने गड्ढों में बारिष का पानी भर जाने से दोपहिया वाहन चालक और सायकल सवार दुर्घटनाग्रस्त भी हो रही है, ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में हुई गड़बड़ी के मामले की जांच करा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है।